देश

ये बिहार का भौकाल है..! ‘मेड इन मढ़ौरा’ इंजन से दौड़ेगी गिनी की रेलगाड़ी, अफ्रीका में डिलीवरी जारी

Indian Railways Export: बिहार भारत के नए सपनों को उड़ान दे रहा है. बिहार के सारण जिले में स्थित मढ़ौरा का रेल इंजन कारखाना अब ‘मेक इन इंडिया’ की अवधारणा को साकार करते हुए दुनिया के नक्शे पर अपनी पहचान बना रहा है. इस कारखाने ने अफ्रीकी देश गिनी के लिए 3,000 करोड़ रुपये का एक बड़ा सौदा किया है, जिसके तहत 140 लोकोमोटिव इंजनों का निर्यात किया जाना है. पहली खेप रवाना हो चुके हैं, और यह व्यापार बिहार के औद्योगिक विकास में एक नई इबारत लिख रही है. यह महज एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि बिहार के ‘भौकाल’ का प्रतीक है.

बिहार के मढ़ौरा में मौजूद रेल इंजन कारखाने ने नई इबारत लिख दी है. यहां तैयार हो रहे इंजन अफ्रीकी देश गिनी की पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार हैं. चार इंजन की पहली खेप वहां के लिए रवाना हो गई है. मेक इन इंडिया की अवधारणा को सार्थक बनाते हुए निर्यात किए जाने वाले इन इंजनों का नाम ‘कोमो’ रखा गया है.

गिनी देश के साथ हुआ था समझौता

गिनी देश का एक प्रतिनिधि मंडल इस वर्ष मई-जून में यहां आया हुआ था. इस दौरान 140 लोकोमोटिव इंजन के निर्यात का 3 हजार करोड़ रुपये कॉन्ट्रैक्ट इस कंपनी के साथ हुआ था. इसके तहत दो महीने बाद ही पहली खेप रवाना हो रही है. जल्द ही ‘कोमो’ की अन्य खेप रवाना की जाएगी.

कोमो इंजन की विशेषताएं

गिनी देश के लिए निर्यात होने वाले इन रेल इंजनों की क्षमता 4500 हॉर्स पॉवर है. इन इंजनों में इवेंट रिकॉर्डर, लोको कंट्रोल, खास तरह का ब्रेक सिस्टम एएआर समेत अन्य कई खास तरह के उपकरण लगाए गए हैं.

ये भी पढ़ें: निक्की अकेली नहीं! जानिए भारत में रोजाना दहेज के लिए कितनी बेटियों की होती है हत्या?

मढ़ौरा कारखाने की विशेषताएं

  • 200 एकड़ में फैला है मढ़ौरा रेल कारखाना
  • निर्माण की प्रक्रिया अक्टूबर 2015 से शुरू हुई थी
  • यहां निर्माण का कार्य 2018 से शुरू हुआ था
  • जून 2025 से निर्यात की प्रक्रिया शुरू हो गई है
  • औसतन दो दिन में एक लोको इंजन तैयार किया जाता है

कारखाने में बिहार के कर्मचारी

इस कारखाने में 1528 कर्मचारी काम करते हैं, जिसमें 99 फीसदी कर्मी बिहार के रहने वाले हैं. साथ ही महिला कर्मियों की संख्या भी काफी है और वे कई बेहद महत्वपूर्ण कार्य मसलन वेल्डिंग, क्रेन संचालन, एसेंबली, टेस्टिंग में लगी हुई हैं.

  • इस कारखाने में महिला कर्मियों की संख्या भी काफी है.
  • महिलाएं मसलन वेल्डिंग, क्रेन संचालन, एसेंबली, टेस्टिंग में लगी हुई हैं.
  • कर्मचारियों की औसत उम्र 24 वर्ष है.
  • बिहार के 17 अलग-अलग तकनीकी संस्थानों से यहां नियुक्ति मिली है.

आर्थिक तरक्की का कारखाना

इस रेल इंजन कारखाने से प्रति वर्ष बिहार और केंद्र सरकार को खासी कमाई होती है. इसके खुलने से इलाके में आर्थिक गतिविधि बढ़ गई है. इस समय यहां 3 होटल, 7 रेस्टॉरेंट, 6 स्कूल, 3 बैंक, 6 एटीएम समेत अन्य सुविधाएं विकसित हुई हैं. इस कारण यहां कारखाने के अलावा भी रोजगार तैयार हुए हैं.

  • इस रेल इंजन कारखाने से प्रति वर्ष बिहार को 900 करोड़ रुपये की जीएसटी प्राप्त होती है.
  • इतनी ही जीएसटी केंद्र सरकार के खाते में भी जाती है.
  • बिजली की बात करें तो इसका सालाना बिल 50 करोड़ रुपये से अधिक होता है.
  • इस कंपनी के खुलने से आसपास के इलाके में आर्थिक गतिविधि कई तरह से बढ़ी है.

ये भी पढ़ें: भारत पर टैरिफ से अमेरिका में मचा हड़कंप, डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से खड़ा हुआ ‘पेट का सवाल’

वैश्विक मंच पर बिहार की छाप

मढ़ौरा का रेल इंजन कारखाना न केवल भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक सफल उदाहरण है, बल्कि यह बिहार के औद्योगिक परिदृश्य में एक क्रांति ला रहा है. 99% बिहारी कर्मचारियों के साथ, यह फैक्ट्री स्थानीय रोजगार का एक बड़ा केंद्र बन गई है और राज्य को सालाना 900 करोड़ रुपये का जीएसटी भी दे रही है. यह परियोजना न केवल देश को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि अगर सही निवेश और इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी राज्य वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ सकता है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

Recent Posts

पत्नी से नाराज पति ने मायके के बाहर 3 स्कूटियों में लगाई आग, CCTV वीडियो हुआ वायरल

Prayagraj Scooter Fire: प्रयागराज में पत्नी से विवाद के बाद एक युवक ने कथित तौर…

23 seconds ago

लखीमपुर खीरी मामला में सुप्रीम कोर्ट सख्त, ट्रायल जज के खिलाफ जांच तेज करने का दिया निर्देश

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को ट्रायल जज के खिलाफ…

12 minutes ago

500 करोड़ के ट्रस्ट और पॉक्सो मामले के आरोपों पर घिरे सौरभ भारद्वाज, 10 अक्टूबर को आएगा कोर्ट का निर्णय

AAP नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा दर्ज आपराधिक मानहानि…

26 minutes ago

पुरी धाम में दिखा दुर्लभ नजारा, जगन्नाथ मंदिर के नीलचक्र से बिखरी चंद्रमा की चांदनी

पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के नीलचक्र के ठीक पीछे चमकता हुआ पूर्णचंद्र दिखाई दिया.…

34 minutes ago

भारत-स्विट्जरलैंड रिश्तों को नई दिशा, माइग्रेशन से स्टार्टअप तक 5 अहम समझौतों पर बनी सहमति

India Switzerland Relations Agreements: भारत और स्विट्जरलैंड ने माइग्रेशन, युवा पेशेवरों, परिवहन तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान…

36 minutes ago

लोध, कुर्मी से पासी-खटिक तक…’, बीजेपी ने यूपी राज्यसभा उम्मीदवारों के जरिये कैसे साधा 2027 का समीकरण?

BJP Rajya Sabha Candidates: उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर से होने वाले राज्यसभा चुनाव को…

38 minutes ago