Donald Trump Tariff On India: राजनीति में कई बार लोग अपने ही बुने जाल में फंस जाते हैं और कुछ ऐसा ही अमेरिका के साथ हो रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीति (आयात शुल्क) से दूसरे देशों को दबाव में लाने की कोशिश की थी, लेकिन अब ये नीति उन्हीं के गले की हड्डी बन गई है. ‘आ बैल मुझे मार’ वाली कहावत की तरह, ट्रंप ने दुनिया पर टैरिफ लगाकर खुद अपने ही देश में महंगाई (Donald Trump Tariff Impact In US) को न्योता दे दिया है. आलम यह है कि अमेरिका का खाद्य उद्योग अब सरकार से गुहार लगा रहा है कि प्रमुख उत्पादों पर लगे टैरिफ हटाए जाएं, क्योंकि इनका सीधा असर आम अमेरिकी की जेब पर पड़ने वाला है. भारत पर लगाए टैरिफ के कारण अमेरिका में पेट का सवाल खड़ा हो गया है.
राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति (Donald Trump Tariff Policy) से अमेरिकी खाद्य उद्योग को खाने-पीने की चीजों के भाव में बढ़ोतरी होने का डर सताने लगा है. ऐसे में उद्योग ने टैरिफ से राहत की मांग की है. उद्योग का कहना है कि प्रमुख खाद्य उत्पादों के आयात पर टैरिफ लागू होने से आम लोगों के लिए खाने-पीनी की चीजें महंगी हो सकती हैं और रेस्टोरेंट समेत खुदरा विक्रेताओं को नुकसान हो सकता है.
खाद्य उद्योग की चिंता
खाद्य उद्योग से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि घरेलू विकल्पों के बिना खाद्य उत्पादों के आयात पर शुल्क लागू करने से किराने का बिल जल्द बढ़ (Rising Food Prices After Donald Trump Tariff) जाएगा. कई विशेषज्ञ पहले से कहते आए हैं कि अगर अमेरिका ऐसे उत्पादों पर आयात शुल्क लगता है, जिसका उत्पादन घरेलू स्तर पर कम होता है, तो ऐसे में आम लोगों को टैरिफ नीति की भारी कीमत चुकानी होगी.
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आयात पर निर्भरता
एक सच यह है कि अमेरिका घरेलू खपत को पूरा करने के लिए अधिकतर खाद्य पदार्थों का उत्पादन खुद करता है. लेकिन, समुद्री भोजन, फल और सब्जियों के लिए अमेरिका आयात पर काफी हद तक निर्भर करता है. जलवायु और नियामक सीमाओं की वजह से इनका घरेलू उत्पादन भी आसानी से नहीं बढ़ाया जा सकता है. ऐसे में इन उत्पादों के लिए अमेरिका की आम जनता को अधिक कीमत चुकानी (Donald Trump Tariff Impact In America) पड़ सकती है.
समुद्री भोजन पर टैरिफ
समुद्री भोजन की कीमतों में बढ़ोतरी होने तय दिखाई पड़ता है, क्योंकि 2024 में अमेरिका ने कनाडा, चिली, भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम से समुद्री उत्पादों का आयात किया था. अकेले भारत ने वित्त वर्ष 2024 में अमेरिका को लगभग 2.3 बिलियन डॉलर मूल्य के झींगे का निर्यात किया. लेकिन, 27 अगस्त को घोषित भारतीय समुद्री भोजन पर नए 50% टैरिफ ने इस व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.
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ताजा उपज पर भी असर
ताजा उपज एक और संवेदनशील क्षेत्र है. 2023 में, मेक्सिको ने अमेरिका में आयातित सभी ताजे फलों का 51 फीसदी और सभी ताजी सब्जियों का 69 फीसदी आपूर्ति की थी. कनाडा ने अतिरिक्त 2 फीसदी फल और 20 फीसदी सब्जियां अमेरिका भेजीं थी. खीरे जैसी वस्तुओं के लिए, लगभग 90 फीसदी आपूर्ति आयात पर निर्भर है, जिसका मतलब है कि कोई भी शुल्क कीमतों को सीधे प्रभावित कर सकता है.
नए शुल्क की दरें (Donald Trump Tariff)
नए शुल्क सभी देशों पर समान रूप से लागू नहीं हैं. अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते के तहत, तीनों सदस्य देशों के बीच व्यापार किए जाने वाले सामान नए शुल्कों से काफी हद तक मुक्त हैं, बशर्ते वे मूल नियमों का पालन करें. यह उत्तरी अमेरिका के भीतर अधिकांश फल और सब्जियों के व्यापार को शुल्क में हुई बढ़ोतरी से बचाने का काम कर रहा है.
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बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने अमेरिकी खाद्य उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. जिन उत्पादों का अमेरिका में पर्याप्त उत्पादन नहीं होता, उन पर शुल्क लगाने से आयातित सामान महंगा होगा, जिसका बोझ सीधे तौर पर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. इस नीति का सबसे बड़ा शिकार भारत जैसे देश बन रहे हैं, जिनसे अमेरिका समुद्री भोजन और अन्य उत्पादों का आयात करता है. यह दिखाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में व्यापारिक युद्ध की नीति दोनों पक्षों के लिए नुकसानदायक होती है. अगर सरकार इस पर जल्द कोई कदम नहीं उठाती है, तो आम अमेरिकी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.
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