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न घोड़ा, न गाड़ी, न बग्घी: बैलगाड़ी में निकली मुख्यमंत्री के बेटे की बारात, सामूहिक विवाह में गठबंधन; देखें वीडियो

Mohan Yadav Son Engagement: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की सगाई के जरिए यह साबित कर दिया कि भव्यता में नहीं, बल्कि सादगी और समाज सेवा में असली मूल्य है. 29 नवंबर को उज्जैन में आयोजित इस सगाई में न तो किसी भव्य डीजे का आयोजन था और न ही किसी सुपर लग्जरी कार का इस्तेमाल. नए जीवन की शुरुआत करने जा रहे जोड़े ने बैलगाड़ी से इंगेजमेंट वेन्यू तक एंट्री की और परिवार के सामने अंगूठी पहनकर अपनी सगाई पूरी की.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपने बेटे की सगाई में लोगों के लिए मिसाल कायम की. उन्होंने दिखा दिया कि दिखावे और भव्यता के बिना भी, सादगी और देसी तरीकों से समाज सेवा और परंपरा का असली मूल्य प्रस्तुत किया जा सकता है.

सगाई में दिखा देसी अंदाज

दरअसल, 29 नवंबर को उज्जैन में मुख्यमंत्री के बेटे की सगाई में न तो किसी तरह की लग्जरी कार दिखाई दी और न ही डीजे था. इसी बीच एक ऐसा पल देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया पर चर्चा तेज कर दी. अपने जीवन की नई शुरुआत कर रहे जोड़े ने इंगेजमेंट वेन्यू तक बैलगाड़ी में एंट्री की, और उनका यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.

सगाई के मौके पर अभिमन्यु यादव और उनकी साथी डॉ. ईशिता पटेल ने अपने लुक को काफी सरल और सादगीपूर्ण रखा. उन्होंने न तो किसी भव्य एंट्री का सहारा लिया और न ही किसी ग्लैमर की जरूरत पड़ी. एंट्री के समय बैलगाड़ी की चक्कियों की आवाज और ढोल-नगाड़ों की धुन के बीच परिवार और रिश्तेदारों ने उनका धूमधाम से स्वागत किया. बाद में जोड़े ने बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर अंगूठी पहनाई और एक-दूसरे के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत की.

शादी का समारोह भी होगा बेहद सादगी भरा

डॉ. अभिमन्यु यादव और डॉ. ईशिता पटेल की शादी 30 नवंबर को पद्मश्री वाकणकर ब्रिज के पास शिप्रा तट पर होने जा रही है. खास बात यह है कि यह केवल उनकी शादी नहीं होगी, बल्कि इस सामूहिक विवाह समारोह में कुल 21 जोड़े एक साथ सात फेरे लेंगे.

सीएम डॉ. मोहन यादव ने शादी के कार्ड में लिखा कि यह आयोजन समाज के हित और सामूहिक खुशी को ध्यान में रखकर किया गया है. उन्होंने मेहमानों से निवेदन किया कि वे सभी नवविवाहित जोड़ों को अपने आशीर्वाद से धन्य करें.

इस कार्यक्रम ने यह साफ कर दिया कि डॉ. मोहन यादव का निजी जीवन भी उनके सादगी और समाजसेवा के नजरिए को दर्शाता है. बेटे की शादी में उन्होंने भव्यता या दिखावे के बजाय सरलता, पारंपरिक रीतियों और सामाजिक जुड़ाव को प्राथमिकता दी. यह कदम लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है कि खुशी का असली मतलब भव्यता में नहीं, बल्कि दिल से मनाए गए उत्सव में होता है.

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– भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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