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खामेनेई की मौत पर भारत में अलाप! सरकार जिससे बच रही, वही कर रही कांग्रेस; ईरान-इजरायल युद्ध पर क्या बोल गए खड़गे?

Mallikarjun Kharge on Khamenei killing: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली हुसैनी खामेनेई की “टारगेटेड हत्या” की कड़ी निंदा की. इसको लेकर उन्होंने कहा कि यह हमला बिना किसी औपचारिक युद्ध की घोषणा के हुआ है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों पर सीधा हमला है. खड़गे ने इस घटना को शासन बदलने के सिद्धांतों और ज़बरदस्ती वाले एकतरफा हस्तक्षेप के फिर से शुरू होने का संकेत बताया.

उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज है क्योंकि सरकार अभी तक सीधे तौर पर इस युद्ध पर कोई टिप्पणी करने से बचती नजर आ रही है. इस जंग में भारत न तो ईरान को सपोर्ट कर रहा और न ही पूरी तरीके से अमेरिका के इस हमले का विरोध कर रहा.

क्या है खड़गे का पूरा बयान?

खड़गे ने कहा कि इंडियन नेशनल कांग्रेस ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली हुसैनी खामेनेई की बिना युद्ध घोषणा के टारगेटेड हत्या की साफ निंदा करती है. हम इस दुख की घड़ी में उनके परिवार, ईरान के लोगों और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं. भारत की विदेश नीति संविधान के अनुच्छेद 51 के अनुसार बातचीत, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और शांति से विवाद सुलझाने पर आधारित है. पश्चिम एशिया में यह संघर्ष वसुधैव कुटुंबकम, महात्मा गांधी की अहिंसा और नेहरू की गुटनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विपरीत है.

यह भी पढ़ें: खामेनेई की हत्या के पीछे किसकी बड़ी साजिश? सऊदी कनेक्शन पर वाशिंगटन पोस्ट का सनसनीखेज दावा

अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया

खड़गे ने जोर देकर कहा कि किसी संप्रभु देश के प्रमुख की टारगेटेड हत्या अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है. संप्रभुता शर्तों पर नहीं होती और राजनीतिक वैधता ताकत से नहीं बनाई जा सकती. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और 2(7) का हवाला देते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ ताकत के इस्तेमाल पर रोक लगाता है. किसी देश के घरेलू मामलों में दखल नहीं दिया जा सकता.

ईरान ही नहीं वेनेजुएला पर भी दिया ज्ञान

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ईरान या पहले वेनेजुएला में किसी संप्रभु देश के नेतृत्व को अस्थिर करने के लिए ताकत का इस्तेमाल शासन बदलने की नीति और ज़बरदस्ती वाले एकतरफा हस्तक्षेप का परेशान करने वाला संकेत है. यह इंपीरियलिज्म के बराबर है और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के साथ मेल नहीं खाता. खड़गे ने कहा कि हर देश के नागरिकों का अपना राजनीतिक भविष्य तय करना उनका मूल अधिकार है. किसी बाहरी ताकत को किसी देश में सरकार बदलने या नेतृत्व को हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है.

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-भारत एक्सप्रेस

 

Rohit Agrawal

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