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बिना बजट और बिना आदेश के रातों-रात बन गया हेलीपैड! उद्घाटन की तैयारी पूरी, पर खर्च का हिसाब ‘लापता’

रिपोर्ट- मुकेश बैरागी


मंडला जिले के टाटरी से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जो सरकारी काम के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े करती है. मामला ‘पीएम श्री हेलीकॉप्टर सेवा’ के उद्घाटन से जुड़ा है, जिसका आगाज प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल को करना है. लेकिन, उद्घाटन की चमक-धमक के पीछे प्रशासनिक लापरवाही और फाइलों का जो ‘खेल’ चल रहा है, उसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

दरअसल, प्रभारी मंत्री के आगमन और राजनीतिक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए टाटरी के रेशम उद्योग केंद्र परिसर में आनन-फानन में एक अस्थायी हेलीपैड तैयार कर दिया गया. लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस निर्माण को लेकर न तो किसी विभाग के पास कोई पुख्ता जानकारी है और न ही बजट का अता-पता.

हैरानी की बात यह है कि जब इस निर्माण के बारे में अधिकारियों से पूछा गया, तो सबने चुप्पी साध ली. अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि आखिर यह हेलीपैड किसके आदेश पर बना? इसके लिए फंड कहां से आया और इसे बनाने में कुल कितनी सरकारी राशि खर्च की गई? सरकारी विभागों के बीच जिम्मेदारी का ऐसा ‘म्यूजिकल चेयर’ चल रहा है कि किसी को कुछ नहीं मालूम.

जब लोक निर्माण विभाग (PWD) के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ा ही गोलमोल जवाब दिया. उनका कहना है कि “प्रशासन ने जगह चिन्हित की थी और निर्माण के खर्च की जानकारी भी प्रशासन से पूछकर ही दी जाएगी.” अब सवाल यह उठता है कि अगर निर्माण PWD ने कराया है, तो उसकी लागत की फाइलें प्रशासन के पास क्यों होंगी?

जवाबदेही से क्यों बच रहे हैं अधिकारी?

स्थानीय लोगों और जानकारों के बीच अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या राजनीतिक कार्यक्रमों की आड़ में नियमों को ताक पर रखा जा रहा है? सबसे बड़ा सवाल यही है कि:

  • बिना किसी वित्तीय स्वीकृति (Financial Approval) के निर्माण कैसे शुरू हो गया?
  • क्या इस अस्थायी हेलीपैड के लिए टेंडर या औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई?
  • अगर फाइलें मौजूद हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करने में परहेज क्यों है?

अक्सर देखा जाता है कि जब जनता के पैसों से कोई भी सरकारी निर्माण होता है, तो उसका पूरा हिसाब पारदर्शी होना चाहिए. लेकिन टाटरी के इस मामले में प्रशासन और PWD विभाग, दोनों ही एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं.

उद्घाटन तो हो जाएगा, पर हिसाब कौन देगा?

प्रभारी मंत्री द्वारा हेलीकॉप्टर सेवा का उद्घाटन तो धूमधाम से हो जाएगा, आसमान में हेलीकॉप्टर भी उड़ेंगे, लेकिन सवाल यही है कि क्या इस हेलीपैड की असल लागत कभी फाइलों से निकलकर जनता के सामने आएगी? फिलहाल, न तो जिला प्रशासन की ओर से और न ही PWD विभाग की तरफ से कोई लिखित या स्पष्ट बयान आया है.

ये भी पढ़ें: सीसीटीवी तोड़ा, गार्ड को कूटा और ले उड़े डेढ़ करोड़ की सिगरेट, फरीदाबाद में बदमाशों का फिल्मी अंदाज में तांडव

-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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