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Maritime Trade Security: सरकार ने 12,980 करोड़ रुपए की गारंटी के साथ इस बीमा पूल को मंजूरी दी है, जो जहाज, माल, थर्ड पार्टी जिम्मेदारी (P&I) और युद्ध जैसे जोखिमों को कवर करेगा. इसका उद्देश्य विदेशी बीमा पर निर्भरता कम करना और देश में ही मजबूत समुद्री बीमा व्यवस्था विकसित करना है. यह पहल भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ समुद्री व्यापार की निरंतरता और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.
18 अप्रैल को पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय जहाजों और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में 12,980 करोड़ रुपए की सरकारी गारंटी के साथ एक घरेलू बीमा पूल बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है.
इस नए पूल को ‘भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (बीएमआई पूल)’ नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य भारतीय झंडे वाले या भारत से जुड़े जहाजों को लगातार और किफायती बीमा सुविधा देना है, चाहे वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय मार्ग से माल ला रहे हों या भेज रहे हों.
यह पूल समुद्री व्यापार से जुड़े सभी प्रमुख जोखिमों को कवर करेगा, जिसमें जहाज और मशीनरी, माल ढुलाई, तीसरे पक्ष की जिम्मेदारी यानी पीएंडआई (सुरक्षा और क्षतिपूर्ति) और युद्ध से जुड़े जोखिम भी शामिल होंगे.
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस बीमा पूल के जरिए बीमा कंपनियां मिलकर पॉलिसी जारी करेंगी और इसकी कुल अंडरराइटिंग क्षमता लगभग 950 करोड़ रुपए होगी. इससे देश के भीतर ही बीमा और जोखिम प्रबंधन की क्षमता मजबूत होगी.
यह पहल भारत को अपने समुद्री बीमा सिस्टम को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी. साथ ही, देश में मरीन बीमा, क्लेम मैनेजमेंट और कानूनी विशेषज्ञता भी विकसित होगी, जो भारतीय शिपिंग सेक्टर की जरूरतों के अनुसार होगी.
सरकार ने कहा कि वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के कारण समुद्री व्यापार पर असर पड़ा है. जहाजों और माल के नुकसान का जोखिम बढ़ गया है, जिससे बीमा महंगा और मुश्किल होता जा रहा है.
फिलहाल भारतीय जहाज पीएंडआई बीमा के लिए काफी हद तक इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (आईजीपीएंडआई) क्लब पर निर्भर हैं, जो तेल प्रदूषण, जहाज दुर्घटना, माल के नुकसान और क्रू से जुड़े जोखिमों को कवर करता है.
सरकार ने कहा कि प्रतिबंध या भू-राजनीतिक तनावों के कारण बीमा कवरेज वापस लेने की स्थिति में संप्रभुता और व्यापार की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक घरेलू समुद्री जोखिम बीमा पूल की आवश्यकता थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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