देश

“हम सब यहीं के हैं”: मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने ‘एक राष्ट्र, एक पहचान’ के विजन का किया समर्थन

नई दिल्ली, 6 जून, 2026 — बौद्धिक एकजुटता के एक ऐतिहासिक प्रदर्शन में, हरियाणा भवन, नई दिल्ली में आयोजित “एक क़ौम, एक वतन – हिंदुस्तान” की थीम पर आधारित मुस्लिम बौद्धिक सम्मेलन राष्ट्रीय चिंतन का केंद्र बन गया। इस सम्मेलन ने 70 से अधिक प्रतिष्ठित मुस्लिम बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, धर्मविदों, कानूनविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और युवा नेताओं को एक मंच पर एकत्रित किया, जो राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक राष्ट्र-निर्माण के एक अद्वितीय दृष्टिकोण से बंधे थे। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) के मार्गदर्शक एवं वरिष्ठ RSS नेता डॉ. इंद्रेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन को कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा ने सूक्ष्म रणनीति से आकार दिया था। बौद्धिक एवं प्रकाशन प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने इस आयोजन की विविध धागों को एक सूत्र में पिरोया।

एकता के शिल्पकार: कर्नल ताहिर मुस्तफा की बौद्धिक चेतना की रूपरेखा

सम्मेलन को एक शक्तिशाली स्वर देते हुए, कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा, जो जामिया हमदर्द के रजिस्ट्रार भी हैं, ने इस मंच को समाधान-उन्मुख बताया, जो राष्ट्रीय एकीकरण के लिए महज चर्चा से आगे बढ़कर ठोस परिणामों पर केंद्रित था। इस आयोजन में उनकी भूमिका सर्वोपरि रही, क्योंकि उन्होंने नैतिक नेतृत्व और चरित्र-निर्माण पर चर्चा की धुरी को स्थापित किया। कर्नल मुस्तफ़ा ने इस बात पर जोर दिया कि एक सामंजस्यपूर्ण राष्ट्र की वास्तविक नींव नैतिक शक्ति और नागरिक मूल्यों में होती है। उन्होंने स्पष्ट किया: “चर्चाओं को केवल समस्याओं की पहचान से आगे बढ़ना चाहिए और उन व्यावहारिक समाधानों पर केंद्रित होना चाहिए जो राष्ट्रीय एकता, जनविश्वास और सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करें।” इस नई पहल के प्रमुख आयोजक और प्रेरक शक्ति के रूप में उनकी भूमिका सर्वत्र सराही गई। पूरे दिन उनके विचार इस सम्मेलन की वाचिका के रूप में उभरे। सभा ने उनके “बौद्धिक जागरण” के आह्वान को पूरे उत्साह से स्वीकार किया, जो नकारात्मकता और विभाजन को अस्वीकार करता है, और रचनात्मक सहभागिता और राष्ट्र-निर्माण को अपनाता है।

डॉ. इंद्रेश कुमार: आदर्शों का चयन, विभाजन का निषेध

अपने प्रभावशाली मुख्य भाषण में, डॉ. इंद्रेश कुमार ने इस आयोजन की भावना को शब्दों में पिरोया, यह कहते हुए कि किसी भी समुदाय का भविष्य उसके द्वारा चुने गए आदर्शों से तय होता है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन से गहरी प्रेरणा लेते हुए युवा पीढ़ी से ऐसे आदर्शों को चुनने का आह्वान किया, जो ज्ञान, देशभक्ति, सेवा, नवाचार और मानवता का प्रतीक हों, न कि संघर्ष और विभाजन के प्रतीक। डॉ. कुमार ने दोहराया कि भारत की वास्तविक शक्ति विविधता में एकता में ही निहित है। उन्होंने नागरिकों से विभाजनकारी राजनीति से ऊपर उठकर संवैधानिक मूल्यों में निहित एक साझा राष्ट्रीय पहचान अपनाने का आह्वान किया। डॉ. कुमार ने कहा, “भारत की सच्ची ताक़त केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति में नहीं है, बल्कि उसकी सभ्यतागत ज्ञान-परंपरा और नैतिक प्रभाव में है।” सम्मेलन प्राचीन “नालंदा दृष्टिकोण” से गहराई से प्रेरित था — एक सभ्यतागत मार्ग जो विजय या दबाव के बजाय शिक्षा, संवाद, नैतिकता, नवाचार और सांस्कृतिक आत्मविश्वास के माध्यम से नेतृत्व को बढ़ावा देता है।

समावेशिता को बढ़ावा: विकसित भारत की नींव के रूप में शिक्षा

समावेशी विकास पर संवाद को आगे बढ़ाते हुए, प्रोफेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र, MRM के राष्ट्रीय संयोजक एवं अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) के पदाधिकारी अध्यक्ष ने कहा कि भारत की सभ्यतागत चेतना और संवैधानिक ढांचा राष्ट्रीय एकता के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान “समावेशन के महत्वपूर्ण पुल” हैं, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सामाजिक निवेश और सशक्तिकरण: एक कार्य-आह्वान

सामाजिक निवेश के सूत्र को आगे बढ़ाते हुए, डॉ. शालिनी अली, जो एक प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, लेखिका एवं MRM की राष्ट्रीय संयोजक हैं, ने शिक्षा, कौशल विकास और सामुदायिक प्रगति में सामरिक सामाजिक निवेश की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्थायी प्रगति के लिए धैर्य, निरंतरता और दीर्घकालिक दृष्टि की आवश्यकता होती है। उन्होंने ज़कात को सशक्तिकरण के एक शक्तिशाली साधन के रूप में उपयोग करने का आह्वान किया, विशेषकर शिक्षा, उद्यमिता और युवा विकास में। इसी धारा को आगे बढ़ाते हुए, मोहम्मद अफ़ज़ल, MRM के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि समुदाय तब पनपते हैं जब वे देशभक्ति, सेवा, ज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को पूरी निष्ठा से अपनाते हैं।

मीडिया की भूमिका और राष्ट्र की प्रतिबद्धता

शाहिद सईद, MRM के राष्ट्रीय संयोजक एवं मीडिया प्रभारी ने पत्रकारों से सूचना मात्र देने वाला न होकर राष्ट्रीय चिंतन के शिल्पकार बनने का आह्वान किया, जो समाज का विकास और सामाजिक सामंजस्य सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार मीडिया राष्ट्र को प्रगति की ओर ले जाने में केंद्रीय भूमिका निभाती है, और उसे एकता की आवाज बनना चाहिए।

इस सम्मेलन में बौद्धिक प्रतिभाओं की एक असाधारण सूची उपस्थित थी, जिनमें शामिल थे: प्रोफ़ेसर हनीफ (शिक्षाविद्), श्री फैज़ अहमद फैज़ (राष्ट्रीय सह-संयोजक), डॉ. जावेद आलम (शोधकर्ता), डॉ. तैदुर इस्लाम (शोधकर्ता), डॉ. शाहिद अशरफ़ (पीएम संग्रहालय), श्री ज़ियाउल मुस्तफ़ा (शिक्षाविद्), श्री हारिस उल हक़ (शिक्षाविद्), प्रोफ़ेसर नफ़ीस (शिक्षाविद्), प्रोफ़ेसर अंजुम परवेज़ (शिक्षाविद्), हसीन उज़ ज़मान (शिक्षाविद्), डॉ. बबली परवीन (शिक्षाविद्), प्रोफ़ेसर नुज़हत परवीन (शिक्षाविद्), अधिवक्ता मोहम्मद यासीन ख़ान (वकील), डॉ. निदा अरशी (शिक्षाविद्), डॉ. मोहम्मद वसीम (शिक्षाविद्), डॉ. जावेद चारन (शिक्षाविद्), डॉ. अनवर जहां (शिक्षाविद्), डॉ. शाइस्ता समी (शिक्षाविद्), डॉ. मारूफ़ उर रहमान (शिक्षाविद्), डॉ. ज़फ़र सनी (शिक्षाविद्), डॉ. मुर्तज़ा (शिक्षाविद्), डॉ. सरफ़राज़ (शिक्षाविद्), अधिवक्ता मुशीर ख़ान (दिल्ली), मुफ़्ती ज़ाहिद ख़ान (शिक्षाविद्), इसहाक़ सैफ़ी (संपादक), प्रोफ़ेसर ज़फ़र नोमानी (एस्टेट अधिकारी), डॉ. उम्मे ऐमन (शोधकर्ता), अब्दुल्लाह एम. चिश्ती (शिक्षाविद्), डॉ. मुहम्मद अरशद (शिक्षाविद्), मौलाना साद रशीद (विद्वान), मौलाना क़ासिम (विद्वान), डॉ. डब्ल्यू.ए. ख़ान (विद्वान), डॉ. मसरूर ख़ान (शिक्षाविद्), डॉ. अयूब ख़ान (प्रशासक), प्रोफ़ेसर जुनैद हारिस (शिक्षाविद्), डॉ. शिज़ा (शिक्षाविद्), डॉ. ज़ुलेख़ा (चिकित्सक), डॉ. नाहिद मुस्तफ़ा (शिक्षाविद्), डॉ. अजमल वसीम (शिक्षाविद्), गौहर आसिफ़ (पत्रकार), जनाब सिराजुद्दीन क़ुरैशी (सामाजिक कार्यकर्ता), डॉ. फ़हीम चौधरी (शिक्षाविद्), मोहम्मद हम्ज़ा अतीक़ (शिक्षाविद्), डॉ. अमरीन (जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ), अधिवक्ता इमरान (वकील), डॉ. जुनैद (शिक्षाविद्), प्रोफ़ेसर मुजीबुर रहमान (शिक्षाविद्), डॉ. एन.एम. परवेज़ (शिक्षाविद्), प्रोफ़ेसर ए.क्यू. अंसारी (शिक्षाविद्), डॉ. शादाब ख़ान (शिक्षाविद्), डॉ. सैयद साजिद मुबीन (शिक्षाविद्), रज़ा रिज़वी (बौद्धिक प्रकोष्ठ, लखनऊ), मोहम्मद इमरान अंसारी, एम.ए. आलम, डॉ. मोहम्मद फ़रहान दीवान (शिक्षाविद्), मोहम्मद शहनवाज़, डॉ. ज़ाफ़र इमाम (शिक्षाविद्), श्री इम्तियाज़, मौलाना हरिज़ अज़ीम (विद्वान), मुफ़्ती ज़हीरुद्दीन (विद्वान), वासिफ़ नवाब, डॉ. तैदुर इस्लाम (शोधकर्ता), आसरा अख़्तर (शोधकर्ता), डॉ. मोहम्मद शाहिद ख़ान (शिक्षाविद्), मदिहा तमीम, ग्रिश जुयाल, ख़ालिदुर रहमान (पत्रकार), यूनुस अहमद, डॉ. ख़ालिद रज़ा ख़ान (पत्रकार) (जो भारत एक्सप्रेस के लिए सम्मेलन रिपोर्ट के लेखक भी हैं), और प्रोफ़ेसर सैफ़ अली चौधरी (शिक्षाविद्)।

सम्मेलन “हिंदुस्तान फ़र्स्ट, हिंदुस्तानी बेस्ट” के सामूहिक संकल्प के साथ संपन्न हुआ, जहाँ सभी प्रतिभागियों ने अपनी चर्चाओं को ठोस कार्यों में बदलने की प्रतिज्ञा की। सम्मेलन ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत का भविष्य संवाद द्वारा विभाजन पर, सहयोग द्वारा टकराव पर और संकीर्ण पहचान के स्थान पर राष्ट्र-निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

Dr. Khalid Raza Khan

Recent Posts

मध्य प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ का आगाज: सीएम मोहन यादव और नितिन गडकरी 351 बसों को दिखाएंगे हरी झंडी

MP SUGAM PARIVAHAN SEVA LAUNCH: मध्य प्रदेश में सरकारी निगरानी वाली सुलभ और सुरक्षित यात्री…

3 hours ago

लापरवाही बनी काल! यमुना एक्सप्रेस-वे पर स्लीपर बस में आग से 9 मौतें

ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेस-वे पर दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में आग…

3 hours ago

दलबदल का खेल: चुनाव जीतने के बाद 111 सांसदों-विधायकों ने पार्टियां बदलीं — जानिए किस राज्य में हुआ सबसे बड़ा परिवर्तन

एडीआर ने नेशनल इलेक्शन वॉच के साथ लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए निर्वाचित…

3 hours ago

60 का दूल्हा, 23 की दुल्हन… तानों की परवाह किए बिना पिंकू संग वर्षा ने लिए सात फेरे

बिहार के लखीसराय में 60 साल के पिंकू सिंह ने 23 साल की वर्षा रानी…

4 hours ago

रिटायर्ड जजों की सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- केंद्र से बनाई जाए राष्ट्रीय नीति

सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को मिलने वाली सुविधाओं में राज्यों के बीच…

4 hours ago

चिता की आग और मोक्ष की नगरी, क्या आपने देखी है बनारस की इस दुनिया की असली तस्वीर?

बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच…

5 hours ago