New India Cooperative Bank scam: न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें वर्षों से सामने आ रही थीं लेकिन आरबीआई ने समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. IndianCooperative.com की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2020 में ही बैंक के पूर्व कर्मचारियों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को बैंक की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में आगाह किया था.
29 जनवरी 2020 को बैंक के पूर्व कर्मचारियों ने आरबीआई के विनियमन विभाग (Regulations Department) के कार्यकारी निदेशक (ED) को एक पत्र भेजा था. इसमें बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष हिरेन भानु के कार्यकाल में हुई वित्तीय अनियमितताओं, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की विस्तृत जानकारी दी गई थी.
रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से पहले बैंक छोटे ऋणों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित था. लेकिन हिरेन भानु के आने के बाद बिना शाखा प्रबंधकों की जानकारी के 25 करोड़ रुपये तक के कॉर्पोरेट ऋण मंजूर किए जाने लगे. इन बड़े ऋणों में से कई एक साल के भीतर ही एनपीए (NPA) बन गए, और धनराशि अन्य बैंकों के माध्यम से डायवर्ट की गई.
पूर्व कर्मचारियों का आरोप है कि 2019 में 80 से अधिक वरिष्ठ कर्मचारियों को जबरन इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया…
पूर्व कर्मचारियों ने अपने पत्र में आरबीआई से मांग की थी कि
लेकिन आरबीआई ने इस पर तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया. 2021 से बैंक की वित्तीय रिपोर्टों में गंभीर विसंगतियां थीं लेकिन आरबीआई की वार्षिक निरीक्षण प्रक्रियाओं में भी इसे नजरअंदाज किया गया.
न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक पिछले दो वित्तीय वर्षों से घाटे में था.
2023 की ऑडिट रिपोर्ट में बैंक के पास 122 करोड़ रुपये की नकदी थी, जो 2024 में 135 करोड़ रुपये हो गई. लेकिन आरबीआई की हालिया कार्रवाई से पता चलता है कि यह नकदी वास्तव में गायब थी!
एक व्हिसल-ब्लोअर ने गंभीर सवाल उठाया, “अगर बैंक के पास नकदी नहीं थी, तो आरबीआई ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या बैंक के गहरे वित्तीय संकट को छिपाने की कोशिश हो रही है?”
पिछले सप्ताह, आरबीआई ने बैंक की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए तत्काल प्रभाव से सख्त प्रतिबंध लगा दिए.
आरबीआई की कार्रवाई के बाद बैंक के ग्राहक और जमाकर्ता अपनी जमा राशि निकालने के लिए बैंक में उमड़ पड़े, लेकिन उन्हें पैसा निकालने नहीं दिया गया.
हालांकि, आरबीआई ने जमाकर्ताओं को आश्वस्त किया है कि उन्हें डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) अधिनियम, 1961 के तहत अधिकतम 5 लाख रुपये की राशि की बीमा सुरक्षा मिलेगी. जमाकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अधिक जानकारी के लिए DICGC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या बैंक से संपर्क करें.
-भारत एक्सप्रेस
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