Nitin Nabin: भाजपा की सियासत में आज एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव होने वाला है. कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना महज औपचारिकता भर रह गया है. 45 साल के नितिन नबीन भाजपा मुख्यालय में नामांकन दाखिल करेंगे. भाजपा के 12वें अध्यक्ष की नॉमिनेशन प्रक्रिया के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी सहित कई नेता मौजूद रहेंगे.
नितिन नबीन से पहले भाजपा में अबतक 11 नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं. जिसमें लालकृष्ण आडवानी 3 बार और राजनाथ सिंह ने 2 बार यह जिम्मेदारी संभाली है.
नॉमिनेशन के दौरान भाजपा शीर्ष नेतृत्व की पूरी पंक्ति का मौजूद होना बताता है कि संगठन ने उनपर पूरा भरोसा जताया है, लेकिन राजनीति में भरोसे के साथ बड़ी जिम्मेदारियां भी आती हैं. अध्यक्ष बनने के साथ ही नितिन नबीन के कंधों पर यह बोझ काफी भारी होने वाला है.
दरअसल नितिन नबीन ऐसे समय भाजपा की कमान संभालने जा रहे हैं जब भाजपा के सामने चुनौतियां नहीं चुनावी रणभूमि का अंबार लगा हुआ है. साल 2026 में 4 अहम राज्यों जिसमें पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और असम में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें से बंगाल, केरल और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा आजतक सत्ता की दहलीज तक नहीं पहुंच पाई है. पश्चिम बंगाल में पार्टी भले ही सालों से आक्रामक रणनीति अपनाई हुई है, लेकिन आजतक सत्ता के करीब नहीं पहुंच पाई है. प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भाजपा को लेकर बर्ताव भी नितिन नबीन के सामने चुनौती पेश करेगा.
नितिन नबीन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भी बड़ी लकीर खींचने की कोशिश करेंगे. भाजपा की तमिलनाडु में सबसे बड़ी चुनौती वहां पर संगठनात्मक विस्तार करना ही है. इसके अलावा दक्षिण के राज्य केरल में भी नितिन नबीन को अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बनाने के लिए अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा.
साल 2027 आते-आते नितिन नबीन पर सियासी दबाव और बढ़ेगा. इस साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे. जो भाजपा के इस सबसे युवा अध्यक्ष की राजनीतिक परीक्षा लेंगे. खासकर भाजपा की चुनावी रणनीति की रीढ़ माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में. जहां जरा सी चूक भाजपा को राष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर बड़ा सेटबैक देने का माद्दा रखता है. इसके अलावा साल 2027 में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव भी हैं. जहां संगठन की एकजुटता और सहयोगी दलों के साथ संतुलन साधना नितिन नबीन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा.
भाजपा के इतिहास में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर विराजने वाले नितिन नबीन सबसे युवा अध्यक्ष के तौर पर गिने जाएंगे. यहीं उनकी ताकत भी होगी और चुनौती भी. नितिन नबीन को पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अंदर ऊर्जा और भरोसा जगाने की जिम्मेदारी तो होगी ही, साथ ही अनुभव की कसौटी पर भी खरा उतरने की चुनौती भी कम नहीं है. क्या नितिन नबीन इन चुनौतियों को अवसर में बदल पाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा….
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