BJP President Election: भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आज अपना 15वां राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने जा रहा है. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) का निर्विरोध चुना है. आज (सोमवार) दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में नामांकन के साथ मुहर लग रही है. नितिन नबीन को नामांकन के बाद आज ही विजेता घोषित कर दिया जाएगा. इस ऐतिहासिक मौके पर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता गवाह बनेंगे.
बता दें कि जेपी नड्डा के बाद 14 दिसंबर 2025 को नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. अब उनकी पूर्णकालिक ताजपोशी की तैयारी है.
कौन हैं नितिन नबीन? (Why BJP Chose Nitin Nabin)
नितिन नबीन का जन्म झारखंड की राजधानी रांची में हुआ था. उनकी शुरुआती और स्कूली शिक्षा (12वीं तक) दिल्ली के CSKM पब्लिक स्कूल से हुई है. वे एक पढ़े-लिखे और सौम्य छवि वाले नेता माने जाते हैं.
नितिन नबीन का राजनीतिक सफर (Nitin Nabin Political Journey)
- नितिन नबीन का सफर जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर शुरू हुआ था. वहीं ग्राउंड पर काम करते हुए युवा मोर्चा से अध्यक्ष तक पहुंचे हैं.
- BJYM के सिपाही के तौर पर उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) में वर्षों तक काम किया और राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी संभाली
- 5 बार के विधायक नबीन ने 2006 में पहली बार बिहार विधानसभा में कदम रखा. 2010 से वे पटना की बांकीपुर सीट से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं
प्रभारी के रूप में सफलता (Nitin Nabin Chhattisgarh Victory)
2019 लोकसभा चुनाव में वे सिक्किम के प्रभारी रहे. उनकी असली परीक्षा 2023 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में हुई, जहां वे प्रभारी थे. उनके बेहतरीन ‘बूथ मैनेजमेंट’ ने बीजेपी को वहां सत्ता में वापसी दिलाई. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने छत्तीसगढ़ का प्रभार संभाला.
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संघ और विरासत की जड़ें
- नितिन नबीन की जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जनसंघ से गहरी जुड़ी हैं
- वे कायस्थ समाज से आते हैं, जो बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है
नितिन नबीन को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा जनसंघ के समर्पित सदस्य और विधायक रहे थे. पिता के निधन के बाद नितिन ने उनकी विरासत को न सिर्फ संभाला बल्कि उसे राष्ट्रीय स्तर तक ले गए.
आखिर नितिन नबीन ही क्यों? (Why Nitin Nabin?)
बीजेपी ने उन्हें कमान सौंपने का फैसला क्यों किया, इसके पीछे 5 बड़ी वजहें मानी जा रही हैं.
- संगठनात्मक अनुभव: उनके पास दो दशकों का लंबा संगठनात्मक अनुभव है.
- साइलेंट वर्कर: वे बिना शोर-शराबे के संगठन के लिए काम करने वाले नेता हैं. छत्तीसगढ़ की जीत इसका बड़ा उदाहरण है.
- युवा चेहरा: वे पार्टी के लिए एक यंग और एनर्जेटिक विजन लेकर आए हैं, जो युवाओं को प्रेरित करता है.
- संघ का भरोसा: आरएसएस बैकग्राउंड होने के कारण उन्हें नागपुर (संघ मुख्यालय) का पूरा समर्थन प्राप्त है.
- जमीनी पकड़: 5 बार लगातार चुनाव जीतना उनकी जनता के बीच मजबूत पकड़ को दर्शाता है.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है. 6 अप्रैल 1980 को अपनी स्थापना से लेकर जनवरी 2026 तक, यानी पिछले 45 साल और 9 महीनों में पार्टी ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है. अब जब पार्टी को अपना नया ‘बॉस’ मिलने जा रहा है. यह जानना दिलचस्प है कि अब तक पार्टी की कमान किन 11 दिग्गजों के हाथों में रही है. इन 45 सालों में बीजेपी ने 14 अध्यक्षीय कार्यकाल देखे हैं, लेकिन चेहरा बदलने के बजाय पार्टी ने कई बार अपने पुराने सिपहसालारों पर भी भरोसा जताया है. पढ़ें पूरी स्टोरी…
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