पूर्वोत्तर में पहाड़ों और नदियों को चीरकर आसमान से पहुंच रही है दवाइयां.
Medical Drones Northeast: भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में युवा ड्रोन पायलट स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी चुनौती को दूर करने में मदद कर रहे हैं. जिन इलाकों में पहाड़ों, नदियों, खराब सड़कों और मौसम की वजह से दवाएं पहुंचाना मुश्किल होता है, वहां अब ड्रोन के जरिए जरूरी मेडिकल सामान भेजा जा रहा है. इससे सड़क के रास्ते होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल रही है.
सरकार के सहयोग से शुरू किए गए परीक्षणों और ड्रोन सेवाओं के विस्तार के साथ इस तकनीक का इस्तेमाल वैक्सीन, दवाएं, जांच के सैंपल और दूसरी जरूरी मेडिकल चीजें पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. खास बात यह है कि कुछ ड्रोन ऑपरेटरों और पायलटों ने डिलीवरी में लगने वाले कुल समय में 80 फीसदी तक की कमी दर्ज होने की जानकारी दी है.
मेडिकल ड्रोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जरूरी सामान पहुंचाने के लिए अब केवल सड़क की स्थिति पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. दूरदराज के इलाकों में पहले दवाओं और मेडिकल सामान की डिलीवरी ट्रैफिक, भूस्खलन, नदियों को पार करने और खराब मौसम जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करती थी. कई बार इन वजहों से स्वास्थ्य केंद्रों तक जरूरी सामान पहुंचने में काफी समय लग जाता था.
ड्रोन के जरिए तय हवाई रास्तों से सामान भेजा जा सकता है. इससे स्वास्थ्यकर्मियों को जरूरत पड़ने पर जरूरी मेडिकल सप्लाई जल्दी मंगाने का एक और विकल्प मिलता है.
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने साल 2021 में i-DRONE पहल शुरू की थी. इसके तहत मणिपुर और नगालैंड के उन इलाकों में ड्रोन से वैक्सीन और मेडिकल सामान पहुंचाने की संभावनाओं का परीक्षण किया गया, जहां पहुंचना आसान नहीं है.
इसके बाद इस पहल के तहत दूसरे राज्यों में भी मेडिकल सैंपल, रक्त से जुड़े घटकों और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सामग्रियों की डिलीवरी जैसे इस्तेमाल पर काम आगे बढ़ा.
पूर्वोत्तर भारत इस तकनीक के परीक्षण के लिए अहम क्षेत्र बनकर उभरा है. यहां कई गांव, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला स्तरीय अस्पताल पहाड़ियों, नदियों, खराब सड़कों और लंबे वैकल्पिक रास्तों के कारण एक-दूसरे से दूर हैं.
हालांकि, मेडिकल ड्रोन एंबुलेंस या सड़क के रास्ते होने वाली मेडिकल सप्लाई की जगह नहीं लेते. इनका उद्देश्य उन परिस्थितियों में तेजी से छोटी लेकिन जरूरी मेडिकल खेप पहुंचाना है, जहां हर मिनट कीमती होता है.
किन चीजों की होती है डिलीवरी? वैक्सीन, सामान्य दवाएं, जांच के सैंपल, सर्जरी में इस्तेमाल होने वाला सामान, रक्त से जुड़ी मेडिकल सप्लाई और आपातकालीन जरूरतों का सामान.
कैसे काम करती है यह व्यवस्था? ड्रोन तय स्वास्थ्य केंद्रों या निर्धारित लैंडिंग पॉइंट के बीच उड़ान भरते हैं. इसके लिए प्रशिक्षित पायलटों, जमीन पर काम करने वाली टीम, उड़ान की योजना और जरूरी अनुमतियों की आवश्यकता होती है.
सबसे बड़ा फायदा क्या है? दुर्गम इलाकों में मेडिकल सामान जल्दी पहुंचाना, खासकर उन जगहों पर जहां सड़क के रास्ते डिलीवरी में देरी होती है या समय का अनुमान लगाना मुश्किल होता है.
सबसे बड़ी चुनौती क्या है? इस व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए नियामकीय मंजूरी, भरोसेमंद हवाई मार्ग, मौसम की निगरानी, प्रशिक्षित कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के भरोसे की जरूरत है.
आगे क्या होगा? ड्रोन सेवाओं को अस्पतालों की नियमित कार्यप्रणाली से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा, ताकि इनका इस्तेमाल केवल परीक्षण या प्रदर्शन तक सीमित न रहे, बल्कि रोजमर्रा की स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बन सके.
पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक परिस्थितियां मेडिकल ड्रोन के इस्तेमाल की संभावनाओं को समझने के लिए काफी अहम हैं. यहां कई ऐसे इलाके हैं, जहां हवाई रास्ते से सामान पहुंचाने और सड़क मार्ग से डिलीवरी करने में लगने वाले समय का अंतर काफी ज्यादा हो सकता है.
ICMR ने पूर्वोत्तर भारत में अपने काम के दौरान अलग-अलग तरह के इलाकों में ड्रोन के इस्तेमाल की संभावनाओं को परखा. इनमें मैदानी क्षेत्र, द्वीप, पहाड़ियों की तलहटी और ऊंचे पहाड़ी इलाके शामिल थे. इस तरह यह पहल केवल एक निश्चित रास्ते पर ड्रोन उड़ाने का प्रदर्शन भर नहीं रही, बल्कि अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता समझने का प्रयास भी बनी.
इस काम से यह भी सामने आया कि मेडिकल ड्रोन डिलीवरी केवल उड़ान भरने और सामान पहुंचाने तक सीमित नहीं है. इसके लिए पूरी व्यवस्था का सही तरीके से काम करना जरूरी है.
इसमें सामान को उड़ान के लिए ठीक से तैयार करना, जरूरत पड़ने पर निर्धारित तापमान बनाए रखना, सुरक्षित तरीके से ड्रोन को उड़ाना और उतारना, उड़ान पर नजर रखना और सामान को संबंधित स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाना शामिल है.
मेडिकल ड्रोन के इस्तेमाल को आगे बढ़ाने में निजी कंपनियों की सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे परीक्षणों का भी योगदान रहा है.
TechEagle से जुड़ी ड्रोन सेवाओं और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कुछ परीक्षणों में दूरदराज के रास्तों पर तेजी से डिलीवरी की जानकारी दी गई है. कुछ मामलों में दवाएं अपने गंतव्य तक कुछ ही मिनटों में पहुंच गईं, जबकि सड़क मार्ग से वहां पहुंचने में एक घंटे से ज्यादा समय लग सकता था.
ऐसे उदाहरण बताते हैं कि दुर्गम इलाकों में मेडिकल ड्रोन का इस्तेमाल समय बचाने के साथ-साथ जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है.
मेडिकल ड्रोन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने की है. शुरुआती परीक्षणों में सफलता मिलने के बाद इसे ऐसी भरोसेमंद व्यवस्था में बदलना जरूरी है, जिस पर स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से निर्भर कर सकें.
इसके लिए ऐसे स्पष्ट नियमों की जरूरत है, जिनके तहत ड्रोन पायलट की सीधी नजर की सीमा से आगे भी सुरक्षित उड़ान भर सकें. इसके अलावा प्रशिक्षित युवा पायलट, ड्रोन की मरम्मत और रखरखाव करने वाली टीमें और अस्पताल के ऐसे कर्मचारी भी जरूरी हैं, जो यह समझ सकें कि किन परिस्थितियों में ड्रोन से सामान मंगाना सबसे बेहतर विकल्प होगा.
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स्वास्थ्य सेवाओं में मेडिकल ड्रोन का महत्व केवल नई तकनीक के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है. इसका असली फायदा जरूरत के समय जल्दी मेडिकल सामान पहुंचाने, आपातकालीन सप्लाई की बेहतर योजना बनाने और सड़कों के बंद होने पर भी जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने में है.
पूर्वोत्तर भारत जैसे दुर्गम क्षेत्रों में यह तकनीक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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