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‘ताकत का इस्तेमाल दूसरों को सशक्त बनाने में हो’, ब्लूमबर्ग फोरम में पीएम मोदी का बड़ा संदेश

Bloomberg Economy Forum PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भारत की सोच और बदलती दुनिया में तकनीक की भूमिका पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में ताकत का मतलब तेजी से बदल रहा है. आज डेटा, ज्ञान और इनोवेशन किसी भी देश की असली ताकत बन चुके हैं. हालांकि, इनका महत्व सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि ये किसके पास हैं, बल्कि इससे तय होता है कि इनका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है.

भारत में पहली बार हुआ फोरम का आयोजन

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों का स्वागत किया. उन्होंने फोरम के आयोजन के लिए माइकल ब्लूमबर्ग और उनकी पूरी टीम को बधाई दी. पीएम मोदी ने कहा कि यह मंच हर बार दुनिया के बेहतरीन लोगों को एक साथ लाता है, जहां अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होती है. इस बार पहली बार भारत में इसका आयोजन होना खास बात है.

प्रधानमंत्री ने माइकल ब्लूमबर्ग की तारीफ करते हुए कहा कि उनका तीन दशक से भी लंबा सफर रहा है. उन्होंने मीडिया जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है और एक सफल पेशेवर के साथ समर्पित व्यक्ति के रूप में भी काम किया है. मोदी ने कहा कि उन्होंने भारत के प्रति ब्लूमबर्ग के लगाव को करीब से महसूस किया है.

ताकत का इस्तेमाल दूसरों को आगे बढ़ाने में हो

फोरम की थीम का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हर दौर में शक्ति के मायने अलग रहे हैं. लेकिन आज के समय में डेटा, ज्ञान और नए विचार दुनिया को बदलने की क्षमता रखते हैं. ऐसे में सवाल केवल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है.

उन्होंने कहा कि क्या तकनीक का फायदा सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित रहेगा या इससे करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे? क्या ज्ञान कुछ लोगों की ताकत बनकर रह जाएगा या इससे समाज के हर वर्ग की क्षमता बढ़ेगी? प्रधानमंत्री के मुताबिक, इसी सोच से ‘पावर टू एंपावर’ यानी दूसरों को सशक्त बनाने का विचार निकलता है.


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भारतीय परंपरा से जुड़ा है सशक्त बनाने का विचार

पीएम मोदी ने कहा कि दूसरों को सशक्त बनाने की भावना भारत के लिए नई नहीं है. यह देश की हजारों साल पुरानी परंपराओं में मौजूद रही है. भारत ने इस विचार को अपनी शासन व्यवस्था और काम करने के तरीकों में उतारने की कोशिश की है.

अपनी बात समझाने के लिए प्रधानमंत्री ने संस्कृत की एक कहावत भी सुनाई. इसका भावार्थ है कि ज्ञान, धन और शक्ति का सही मूल्य इस बात से तय होता है कि उनका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाता है. यदि इनका इस्तेमाल दूसरों को नुकसान पहुंचाने के बजाय ज्ञान बांटने, मदद करने और लोगों की रक्षा के लिए हो, तो इनका महत्व और बढ़ जाता है.

प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि बदलती दुनिया में असली ताकत केवल संसाधन जुटाने में नहीं, बल्कि उनका इस्तेमाल समाज को आगे बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को अवसर देने में है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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