PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों के साथ एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर साझा की. पीएम मोदी ने बताया कि उनकी हालिया नीदरलैंड यात्रा के दौरान 11वीं सदी के ऐतिहासिक ‘चोल ताम्र-पत्र’ (Chola Copper Plates) भारत वापस ले आए गए हैं. राजा राजेंद्र चोल के काल के ये ताम्र-पत्र भारत की प्राचीन विरासत का अनमोल हिस्सा हैं. पीएम मोदी ने इस कामयाबी पर खुशी जताते हुए कहा कि यह हर भारतीय को गर्व से भर देने वाला पल है.
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक पल को याद करते हुए कहा, “बीते दिनों मुझे नीदरलैंड जाने का अवसर मिला था. वहां कई महत्वपूर्ण बैठकों के बीच एक ऐसा क्षण आया, जिसने हर भारतीय का सीना चौड़ा कर दिया.
नीदरलैंड में आयोजित एक विशेष और भव्य समारोह में चोल काल की ये प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं. इस खास मौके पर वहां के प्रधानमंत्री भी खुद मौजूद थे.” पीएम ने बताया कि इन ताम्र-पत्रों के भारत आने के बाद से उन्हें देश-विदेश, खासकर दुनिया भर के तमिल समुदाय से लगातार बधाई और गर्व से भरे संदेश मिल रहे हैं.
आम जनता और इतिहास प्रेमियों की जिज्ञासा को शांत करते हुए पीएम मोदी ने इन ताम्र-पत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक सेट में कुल 24 ताम्र पट्टिकाएं हैं, जिनमें 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टियां शामिल हैं और ये मुख्य रूप से तमिल भाषा में लिखी गई हैं.
ये ताम्र-पत्र महान चोल शासक राजा राजेंद्र चोल-प्रथम से जुड़े हैं, जिन्होंने अपने पिता राजा राजराजा चोल के एक पुराने वचन को पूरा करने के लिए इन्हें तैयार करवाया था. इन पट्टिकाओं में ‘आनइमंगलम्’ गांव को एक बौद्ध विहार को दान में दिए जाने का ऐतिहासिक उल्लेख मिलता है. इसके साथ ही पीएम मोदी ने यह भी बताया कि इन शिलालेखों में चोल वंश की महान उपलब्धियों का जिक्र है, जिससे साफ पता चलता है कि उस दौर में चोल साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी विशाल थी और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के व्यापारिक व सांस्कृतिक संबंध कितने मजबूत थे.
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चोल साम्राज्य के अलावा पीएम मोदी ने देश के भीतर हुई एक और बड़ी ऐतिहासिक खोज का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में भी तीन बेहद दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं.
विशेषज्ञों के मुताबिक, ये ताम्र-पत्र पांडुवंशी राजवंश के राजा महर्षि बालार्जुन के शासनकाल (छठी-सातवीं सदी) के हैं, जो करीब 1400 से 1500 साल पुराने हैं. प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखे गए इन शिलालेखों से उस दौर की शासन-व्यवस्था, धर्म और भारतीय संस्कृति के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं. पीएम मोदी ने साफ किया कि सरकार भारत की ऐसी हर अमूल्य और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
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-भारत एक्सप्रेस
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