PM Modi tribute Ram Manohar Lohia Jayanti: आधुनिक भारत के निर्माण में वैचारिक क्रांति फूंकने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर सोमवार, 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नमन किया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लोहिया जी को एक ‘बहुआयामी व्यक्तित्व’ करार दिया, जिन्होंने न केवल औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जनता को लामबंद किया, बल्कि आजादी के बाद भारत की प्रगति की दिशा तय करने में भी अमूल्य भूमिका निभाई.
पीएम मोदी ने विशेष रूप से लोहिया जी के ‘लैंगिक समानता’ और ‘सहभागी शासन’ के विचारों को आज के समय में भी उतना ही उल्लेखनीय बताया. प्रधानमंत्री के अनुसार, गरीबों और वंचितों के उत्थान के लिए लोहिया जी का अटूट संकल्प आज की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक का कार्य कर रहा है.
गृह मंत्री अमित शाह ने डॉ. लोहिया के योगदान को याद करते हुए उन्हें सामाजिक शुचिता का आदर्श बताया. शाह ने लिखा कि लोहिया जी ने अपना पूरा जीवन समानता, शिक्षा और स्वभाषा (हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाएं) के संवर्धन के लिए समर्पित कर दिया.
वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोहिया जी को सामाजिक न्याय का प्रतीक बताते हुए कहा कि वंचितों को सशक्त बनाने और एक मजबूत भारत के निर्माण के लिए उनके विचार सदैव प्रेरणीय रहेंगे. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी लोहिया जी के संघर्षों को याद करते हुए उन्हें शोषित वर्ग का मसीहा करार दिया.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने डॉ. लोहिया की जयंती पर उनके मूल्यों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने ‘अंतिम व्यक्ति’ तक विकास पहुँचाने का जो मार्ग दिखाया था, वह एक समावेशी और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण की प्रेरणा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी डॉ. लोहिया को श्रद्धासुमन अर्पित किए. उत्तर प्रदेश में लोहिया जी की जयंती को विशेष उत्साह के साथ मनाया गया, जहाँ उनके ‘समाजवाद’ के असली अर्थ यानी ‘सबकी भागीदारी और सबकी प्रगति’ पर चर्चा की गई.
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डॉ. राम मनोहर लोहिया केवल एक राजनेता नहीं बल्कि एक ऐसे दार्शनिक थे जिन्होंने ‘सप्त क्रांति’ के माध्यम से समाज की सात प्रमुख बुराइयों के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया था. उनके विचारों में जातिवाद का खात्मा, नर-नारी की समानता और आर्थिक विषमता को दूर करना प्रमुख था.
आज जब देश ‘विकसित भारत’ की ओर कदम बढ़ा रहा है तब सरकार की योजनाओं में ‘अंत्योदय’ की जो झलक दिखती है, उसे कहीं न कहीं लोहिया जी के उन्हीं सपनों का विस्तार माना जा रहा है. उनकी जयंती पर दी गई ये श्रद्धांजलियां इस बात की गवाह हैं कि डॉ. लोहिया के विचार आज भी भारतीय राजनीति और समाज की धड़कन बने हुए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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