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‘पुरुषार्थ से ही समृद्धि रहेगी अटल…’ पीएम मोदी ने शेयर किया संस्कृत सुभाषित, जानें क्या हैं मायने?

PM Modi Sanskrit Subhashit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (24 जून 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर सनातन संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से जुड़ा एक बेहद गहरा और शक्तिशाली संस्कृत सुभाषित साझा किया है. पीएम मोदी ने देशवासियों को पुरुषार्थ और सामूहिक समर्पण का महत्व समझाते हुए लिखा, “सामूहिक समर्पण और पुरुषार्थ से राष्ट्र की समृद्धि अक्षुण्ण रहती है. यही भावना समाज को नई ऊर्जा देती है और विकास के संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करती है. प्रधानमंत्री का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

क्या है इस श्लोक का अर्थ?(PM Modi Sanskrit Subhashit)

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पोस्ट में जिस संस्कृत श्लोक को साझा किया, वह है: यत्रोत्साहसमारम्भो यत्रालस्यविहीनता. नयविक्रमसंयोगस्तत्र श्रीरचला ध्रुवम्॥

इसका सीधा हिंदी अर्थ है कि जिस देश या समाज में हर परिश्रम राष्ट्रभक्ति के प्रखर उत्साह से प्रेरित होता है, जहां लोग आलस्य को पूरी तरह त्याग कर निरंतर अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, और जहां विनम्रता के साथ-साथ अटूट साहस का अद्भुत संतुलन होता है-वहां त्याग, तप और समर्पण के बल पर राष्ट्र की समृद्धि सदा अटल, अडिग और चिरस्थायी बनी रहती है.

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‘एक्स’ पर मोदी के सुभाषित के मायने क्या?

दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले तीन दिनों से लगातार संस्कृत के सुभाषितों के जरिए देश और समाज को बड़े संदेश दे रहे हैं:

श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि (23 जून): इससे ठीक एक दिन पहले पीएम मोदी ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर “न कर्मणा न प्रजया धनेन…” श्लोक साझा किया था. इसके जरिए उन्होंने संदेश दिया था कि अमृतत्व या महानता केवल धन, वंश या सत्ता से नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वस्व त्याग करने के उच्च आदर्शों से मिलती है.

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (22 जून): वहीं सोमवार को पीएम मोदी ने योग दिवस की वैश्विक सफलता को रेखांकित करते हुए सुभाषित पोस्ट किया था और बताया था कि कैसे योग दुनिया भर में सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा बन रहा है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी द्वारा लगातार प्राचीन संस्कृत श्लोकों का इस्तेमाल करना भारत की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नीति और देश को विकसित बनाने के सामूहिक संकल्प को और धार देने की एक सोची-समझी कूटनीति है.

-भारत एक्सप्रेस

 

Rohit Agrawal

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