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अटल-आडवाणी की जोड़ी मिलना नामुमकिन, पीएम मोदी के लेख ने खोल दिए कई बड़े पन्ने

PM Modi article on LK Advani journey: देश के वरिष्ठ राजनेता और ‘भारत रत्न’ लालकृष्ण आडवाणी के 100वें वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में पीएम मोदी द्वारा लिखे गए विशेष लेख (आर्टिकल) के दूसरे हिस्से में भारतीय राजनीति के कई ऐतिहासिक और अनछुए पहलुओं से पर्दा उठा है. प्रधानमंत्री ने बताया कि किस प्रकार आडवाणी जी के जीवन में आधुनिक भारत के इतिहास के कई बड़े अध्याय समाए हुए हैं.

विभाजन का दर्द और शून्य से नई शुरुआत (PM Modi On Lal Krishna Advani political life)

प्रधानमंत्री ने अपने लेख में याद किया कि कैसे 1947 में विभाजन की विभीषिका के दौरान युवा आडवाणी को सिंध में अपना घर और अपनी जानी-पहचानी दुनिया पीछे छोड़कर सब कुछ शून्य से शुरू करना पड़ा था. तमाम कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनके भीतर चीजों को नए सिरे से खड़ा करने का अदम्य संकल्प था, जो आगे चलकर जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के निर्माण में साफ दिखाई दिया.

अटल और आडवाणी की अटूट जोड़ी

लेख में सबसे खास जिक्र अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के ऐतिहासिक और गहरे रिश्ते का है. प्रधानमंत्री ने लिखा कि राजनीति में अक्सर महत्वाकांक्षाएं टकरा जाती हैं और साथ चलने वाले रास्ते बदल लेते हैं, लेकिन अटल और आडवाणी की पांच-छह दशकों की लंबी यात्रा एक-दूसरे के प्रति अटूट विश्वास, सम्मान और सहयोग की एक बेमिसाल दास्तान है.

छद्म धर्मनिरपेक्षता पर बेबाक रुख

पीएम मोदी ने आडवाणी जी के व्यक्तित्व की दो प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित करते हुए लिखा कि उनकी वैचारिक स्पष्टता, बौद्धिक प्रखरता और उनके लिखे प्रस्ताव आज भी राजनीति को समझने के लिए अमूल्य हैं. इसके साथ ही, भारतीय राजनीति में लंबे समय से चली आ रही छद्म धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ उनका निर्भीक रुख राजनीतिक विमर्श की एक बड़ी वास्तविकता को उजागर करता है.

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गांधीनगर से ‘घर वापसी’ और संसदीय सफर

1991 के लोकसभा चुनावों को याद करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि जब आडवाणी ने गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा, तो वह उनके लिए एक प्रकार से ‘घर वापसी’ जैसा था, क्योंकि उनके पिता विभाजन के बाद कच्छ में आकर बसे थे. संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता के रूप में और एक सांसद के तौर पर उनकी सक्रिय भागीदारी आज भी भारतीय संसदीय इतिहास में एक मिसाल मानी जाती है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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