पेपर लीक के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए राजस्थान की पिछली अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल का जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में गहलोत सरकार के दौरान एक के बाद एक कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई थीं और अकेले 19 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे.
प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस को जवाब दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार साल 2014 के बाद से लगातार यह कोशिश कर रही है कि देश के युवाओं को उनकी मेहनत, योग्यता और मेरिट के आधार पर आगे बढ़ने का मौका मिले. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए हैं, जिससे छात्रों को ज्यादा अवसर मिल सके हैं.
केंद्रीय मंत्री ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि पहले मेडिकल शिक्षा में मैनेजमेंट कोटा जैसी व्यवस्थाएं थीं, जिन्हें खत्म किया गया ताकि योग्य छात्रों को ज्यादा निष्पक्ष अवसर मिल सकें. जोशी के मुताबिक, साल 2014 में देश में मेडिकल सीटों की संख्या करीब 51 हजार थी, जो अब बढ़कर लगभग तीन गुना हो चुकी है. उन्होंने यह भी कहा कि देश में एम्स की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे मेडिकल शिक्षा का दायरा पहले के मुकाबले काफी विस्तृत हुआ है.
नीट परीक्षा विवाद पर अपनी बात रखते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा कि जब पेपर लीक की पुष्टि हुई तो सरकार ने छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा रद्द करने का कठिन फैसला लिया. उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से किया गया था.
उन्होंने दावा किया कि इसके बाद सरकार ने कम समय में पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ दोबारा परीक्षा कराई और परिणाम भी जल्द जारी किए गए. जोशी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए सरकार विशेषज्ञों और अन्य पक्षों से मिलने वाले अच्छे सुझावों को लागू करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा संसद जैसे मंच पर गंभीर और सामूहिक विचार-विमर्श के जरिए होनी चाहिए.
प्रह्लाद जोशी का यह बयान उस समय आया है जब कांग्रेस लगातार परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा रही है. इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया था कि बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी मांगों में बदलाव किया.
दरअसल, कांग्रेस ने छात्रों के मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री आवास के पास विरोध प्रदर्शन किया था. इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई बड़े नेता शामिल हुए थे. प्रदर्शन के दौरान सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने पहुंचे थे.
बाद में जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी ने शुरुआत में एक मांग रखी थी, जिस पर सरकार ने सहमति जताई. लेकिन इसके बाद उन्होंने दो मांगों की बात कही. इसी घटनाक्रम के बाद पेपर लीक और परीक्षा सुधार को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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