Premanand Disciple Rasik Dulari Sharan Biography: वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के केली कुंज आश्रम से जुड़े वराहघाट स्थित ‘गुरु कृपा कुंज’ में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब उनके एक युवा शिष्य की चार मंजिला इमारत की छत से गिरकर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. आश्रम की इमारत से नीचे गिरने के बाद गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
मृतक की पहचान मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी 25 वर्षीय दीपक लोधी के रूप में हुई है, जिन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ग्रहण करने के बाद अपना आध्यात्मिक नाम ‘रसिक दुलारी शरण’ रख लिया था.
जबलपुर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पिता का नाम चेतन है. परिवार में उनके माता-पिता के अलावा एक बड़ी बहन और छोटा भाई मनीष हैं. पारिवारिक सूत्रों और भाई मनीष के अनुसार, दीपक पढ़ाई-लिखाई में काफी अच्छे थे और उन्होंने कॉलेज तक की शिक्षा पूरी की थी.
कॉलेज के बाद वे एक कुशल बिजली मिस्त्री (इलेक्ट्रिशियन) के रूप में काम कर रहे थे. हालांकि, सांसारिक कामकाज और जबलपुर के सामान्य जीवन में उनका मन बिल्कुल नहीं लग रहा था. उनकी रुचि बचपन से ही अध्यात्म, पूजा-पाठ और सनातन परंपरा की ओर ज्यादा थी.
वृंदावन आने से पहले दीपक ने मध्य प्रदेश में मां नर्मदा की कठिन पैदल परिक्रमा भी पूरी की थी. इसके बाद वे पहली बार कान्हा की नगरी वृंदावन पहुंचे थे. एक बार घर लौटने के बाद वे दोबारा वृंदावन आ गए और फिर कभी सांसारिक जीवन की ओर मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के सानिध्य में आकर विधिवत दीक्षा ली और सांसारिक पहचान को पीछे छोड़कर ‘रसिक दुलारी शरण’ के रूप में जीवन समर्पित कर दिया.
तकनीकी समझ और इलेक्ट्रिशियन का हुनर होने की वजह से वे आश्रम में बिजली व्यवस्था और मेंटेनेंस से जुड़ी सेवा का जिम्मा संभालते थे. वे राधा वाटिका के समीप वराहघाट स्थित चार मंजिला गुरु कृपा कुंज परिसर में अन्य शिष्यों के साथ रहते थे.
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उनकी मां लोंग बाई पटेल ने बताया कि वे पिछले साल ही बेटे से मिलने वृंदावन आई थीं, जहां उन्होंने पांच दिनों तक रहकर पूरे मथुरा-वृंदावन के दर्शन किए थे. एक शांत, धार्मिक और तकनीकी रूप से दक्ष युवा का इस तरह असमय और रहस्यमयी परिस्थितियों में चले जाना उनके परिवार और आश्रम से जुड़े लोगों के लिए गहरा आघात बन गया है.
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