Punjab MBBS Fee Hike
Punjab MBBS Fee Hike: पंजाब में एमबीबीएस की फीस बढ़ाए जाने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने पंजाब सरकार के इस निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मेधावी छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों के साथ अन्याय बताया है.
डॉ चीमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम की कुल ट्यूशन फीस में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. इसके तहत साढ़े पांच वर्षीय एमबीबीएस कोर्स की फीस 9.98 लाख रुपए से बढ़ाकर 10.83 लाख रुपए कर दी गई है.
उन्होंने कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस वृद्धि का बोझ और भी अधिक है. सरकारी कोटा की फीस में 17.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 21.48 लाख रुपए से बढ़ाकर 25.22 लाख रुपए कर दिया गया है. वहीं, प्रबंधन कोटा की फीस 55.25 लाख रुपए से बढ़कर 64.71 लाख रुपए तक पहुंच गई है.
डॉ. चीमा ने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब हजारों युवा डॉक्टर वर्षों की कठिन पढ़ाई और संघर्ष के बाद भी अस्थायी रोजगार तथा अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि सरकारी सेवा में कई डॉक्टरों को केवल करीब 50 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन पर काम करना पड़ रहा है.
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर पंजाब सरकार राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को क्या संदेश देना चाहती है. एक तरफ मेडिकल शिक्षा लगातार महंगी की जा रही है और दूसरी तरफ लोगों की सेवा करने वाले डॉक्टरों को उचित सम्मान और अवसर नहीं मिल रहे हैं.
अकाली नेता ने कहा कि यह सिर्फ फीस वृद्धि का मामला नहीं है, बल्कि व्यावसायिक शिक्षा तक पहुंच, सामाजिक न्याय, मेडिकल प्रतिभाओं को राज्य में बनाए रखने और पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है.
उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि वह वास्तव में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना चाहती है तो मेडिकल शिक्षा को अधिक किफायती बनाए, डॉक्टरों के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए तथा मेधावी छात्रों को आर्थिक कारणों से अपने सपनों से समझौता करने के लिए मजबूर न करे.
डॉ. चीमा ने चेतावनी दी कि पंजाब ऐसी स्थिति नहीं झेल सकता, जहां राज्य की बेहतरीन चिकित्सा प्रतिभाएं महंगी शिक्षा प्राप्त करने के बाद बेहतर अवसरों की तलाश में राज्य या देश छोड़ने को मजबूर हो जाएं.
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उन्होंने पंजाब सरकार से फीस वृद्धि के फैसले की तत्काल समीक्षा करने, छात्रों और अभिभावकों को राहत देने तथा मेडिकल शिक्षा को सुलभ और सरकारी चिकित्सा सेवा को आकर्षक एवं सम्मानजनक बनाने के लिए व्यापक नीति तैयार करने की मांग की.
(IANS के इनपुट पर आधारित)
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