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‘कुत्ता, बिस्किट और बागी..’, राहुल गांधी ने कुत्ते से खेलकर गंवाया पूरा नॉर्थ ईस्ट, कैसे बिखर गई कांग्रेस?- Explainer

North East Politics: राजनीति में कभी-कभी एक ‘चाय की प्याली’ या ‘बिस्किट की प्लेट’ इतिहास बदल देती है. 2014 से पहले नॉर्थ-ईस्ट को कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता था. उस वक्त 8 राज्यों में भाजपा की एक भी सरकार नहीं थी, कुल जमा 9 विधायक और महज 4 सांसद थे. लेकिन आज तस्वीर 360 डिग्री पलट चुकी है. आज नॉर्थ-ईस्ट के 6 राज्यों में कमल खिला है, 4 में भाजपा के मुख्यमंत्री हैं और विधायकों की संख्या 9 से बढ़कर 197 हो चुकी है. यानी 22 गुना ज्यादा विधायक.

इस सियासी भूचाल (North East Politics) का केंद्र बिंदु गुवाहाटी या शिलांग नहीं, बल्कि दिल्ली में राहुल गांधी का आवास था. जहां एक मुलाकात, एक कुत्ता और एक प्लेट बिस्किट ने कांग्रेस के हाथ से देश का पूरा पूर्वोत्तर हिस्सा छीन लिया. यह कहानी उसी एक गलती और भाजपा के ‘मिशन नॉर्थ-ईस्ट’ की है.

वो फोन कॉल, जिसने खतरे की घंटी बजाई

जून 2014 की दोपहर श्रीनगर की वादियों में छुट्टियां बिता रहे कांग्रेस के संकटमोचक गुलाम नबी आजाद का फोन बजता है. लाइन पर अहमद पटेल थे, संदेश था- ‘मैडम (सोनिया गांधी) बात करना चाहती हैं.’ सोनिया गांधी की आवाज में घबराहट थी. असम में हिमंता बिस्व सरमा ने 40-50 विधायकों के साथ बगावत कर दी थी. सोनिया जानती थीं कि हिमंता का जाना मतलब असम का जाना. उन्होंने आजाद को फौरन दिल्ली तलब किया और मिशन सौंपा असम जाइए, बगावत को थामिए और हिमंता को मनाइए.

ऑपरेशन असम और राहुल का ‘वीटो’

आजाद ने दिल्ली पहुंचकर अपने पुराने सियासी कौशल का इस्तेमाल किया. बागी विधायकों की परेड कराई गई, आंकड़े जुटाए गए. गणित साफ था- हिमंता बिस्व सरमा के पास तरुण गोगोई से ज्यादा विधायक थे. आजाद ने सोनिया को रिपोर्ट दी और सोनिया ने ग्रीन सिग्नल दे दिया कि असम जाकर नेतृत्व परिवर्तन (सीएम बदलना) कर दिया जाए.

लेकिन, क्लाइमेक्स अभी बाकी था. आजाद के असम रवाना होने से ठीक एक रात पहले राहुल गांधी की एंट्री होती है. राहुल ने आजाद को फोन किया और प्लान कैंसिल करने का फरमान सुना दिया. जब आजाद राहुल से मिलने पहुंचे, तो वहां तरुण गोगोई और उनके बेटे गौरव गोगोई पहले से मौजूद थे.

राहुल- अभी जो मुख्यमंत्री (तरुण गोगोई) है, वही रहेगा

आजाद ने चेताया- फिर हिमंता पार्टी छोड़ देगा

राहुल का जवाब था- जाने दो उसे RSS में

कुत्ता, बिस्किट और अपमान का वो घूंट

यह सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं था, बल्कि इसके पीछे ‘व्यवहार’ की वो कहानी थी, जिसे हिमंता बिस्व सरमा ने बाद में बयां किया. हिमंता जब अपनी शिकायतों को लेकर राहुल गांधी से मिलने गए थे, तो वहां एक अजीब वाकया हुआ. एक इंटरव्यू में हिमंता बताते हैं कि

‘हम गंभीर चर्चा कर रहे थे, लेकिन राहुल गांधी अपने कुत्ते के साथ खेलने में व्यस्त थे. उसी दौरान कुत्ते ने टेबल पर रखे बिस्किट की प्लेट में मुंह डाल दिया. मुझे लगा राहुल प्लेट बदलवाएंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. बाकी नेता उसी प्लेट से बिस्किट खाते रहे और राहुल हंसते रहे.’

हिमंता के लिए यह सिर्फ अनदेखी नहीं, अपमान था. वह समझ गए कि यहां अब कोई भविष्य नहीं है. उसी दिन उन्होंने भाजपा के राम माधव से संपर्क किया और नॉर्थ-ईस्ट की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई.

भाजपा का ‘मास्टरस्ट्रोक’

हिमंता के भाजपा में आते ही अमित शाह और राम माधव ने नॉर्थ-ईस्ट के लिए एक नई बिसात बिछाई. भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी ‘बाहरी पार्टी’ का टैग हटाना. भाजपा ने 2016 में ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ (NEDA) बनाया. इसमें स्थानीय क्षत्रपों और छोटी पार्टियों को जोड़ा गया. हिमंता बिस्व सरमा इसके संयोजक बने. इससे भाजपा को स्थानीय स्वीकार्यता मिली.

भाजपा ने बांग्लादेशी घुसपैठ, करप्शन और कांग्रेस द्वारा नॉर्थ-ईस्ट की उपेक्षा को मुद्दा बनाया. असम में सर्वानंद सोनोवाल जैसे जातीय नेता को आगे किया और बाद में हिमंता की रणनीतिक पकड़ का इस्तेमाल किया. नतीजा ये हुआ की धीरे-धीरे बीजेपी ने पूरे नॉर्थ ईस्ट में कब्जा कर लिया.

एक-एक कर ढहते गए किले (North East Politics)

  • असम: 2016 में पहली बार भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. 2021 में सत्ता बरकरार रखी और हिमंता सीएम बने.
  • त्रिपुरा: 2018 में भाजपा ने लेफ़्ट के 25 साल पुराने किले को ध्वस्त कर दिया. शून्य से शिखर का सफर तय करते हुए अपने दम पर सरकार बनाई.
  • अरुणाचल प्रदेश: यहाँ भाजपा ने ‘दलबदल’ की राजनीति से बाजी पलटी. 2016 में कांग्रेस के सीएम पेमा खांडू पूरी कैबिनेट के साथ भाजपा में शामिल हो गए.
  • मणिपुर: 2017 में कम सीटें होने के बावजूद भाजपा ने गठबंधन का गणित सेट किया और सरकार बनाई.

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भगवा हो चुका है नॉर्थ-ईस्ट

आज जब हम नॉर्थ-ईस्ट (North East Politics) के नक्शे को देखते हैं, तो वह भगवा रंग में रंगा नजर आता है. प्रधानमंत्री मोदी का 10 साल में 70 बार नॉर्थ-ईस्ट जाना उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, लेकिन इस बदलाव की नींव उस दिन पड़ी थी, जब एक युवा नेता को अपनी ही पार्टी में सुनने वाला कोई नहीं मिला. राहुल गांधी के लिए वह सिर्फ एक ‘बागी’ थे जिसे जाने दिया गया, लेकिन भाजपा के लिए हिमंता वो ‘चाबी’ साबित हुए, जिसने नॉर्थ-ईस्ट के सातों दरवाजे खोल दिए. कांग्रेस ने सिर्फ एक नेता नहीं खोया, उसने भारत का पूरा पूर्वोत्तर गंवा दिया.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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