INDIAN RAILWAY
देश भर में पटरियों का उन्नयन किया जा रहा है. बेहतर पटरियाँ सुरक्षा और यात्रा की गुणवत्ता में सुधार लाती हैं. 2025 की शुरुआत तक, भारत की 78% पटरियों की गति 110 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक हो जाएगी. 2014 में यह संख्या केवल 39% थी. इस उच्च अनुपात को पिछले दशक में पटरियों की कुल लंबाई में हुई वृद्धि के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. पटरियों की कुल लंबाई 2014 में 79,342 किमी से बढ़कर 2025 में 1 लाख किमी से अधिक हो गई है.
केंद्रीय रेल मंत्री, श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘हम ट्रैक प्रौद्योगिकी और रखरखाव प्रक्रियाओं को महत्वपूर्ण रूप से उन्नत करके ट्रैक की गुणवत्ता में सुधार करेंगे. आधुनिक ट्रैक फिटिंग, ट्रैक मशीनों का उपयोग, अल्ट्रा साउंड फ्रैक्चर डिटेक्शन मशीनें, रोड-कम-रेल वाहन और एकीकृत ट्रैक माप मशीनें हमारे ट्रैक रखरखाव को वैज्ञानिक बना देंगी. दोषों का पता लगाने में एआई का व्यापक रूप से उपयोग किया जाएगा. ये तकनीकी परिवर्तन ट्रैक रखरखाव कर्मचारियों के लिए कार्य स्थितियों में उल्लेखनीय सुधार लाएँगे.’
ट्रैक उन्नयन के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में यात्री डिब्बों के रखरखाव और उन्नयन में भी व्यापक बदलाव आया है. जम्मू-श्रीनगर रेल संपर्क खुलने तक, कश्मीर घाटी का शेष भारतीय रेल नेटवर्क से कोई रेल संपर्क नहीं था. कश्मीर घाटी में डेमू/मेमू रेकों को आवधिक रखरखाव और उन्नयन के लिए कार्यशाला में नहीं लाया जा सका. बडगाम से लखनऊ तक बोगियों को सड़क मार्ग से ट्रेलरों के ज़रिए लाकर आवधिक ओवरहालिंग (पीओएच) की जा रही थी. यह स्थिति अपर्याप्त थी. पहली बार घाटी से रेक को पीओएच के लिए रेल के ज़रिए लखनऊ लाया गया है.
बडगाम में सभी रेकों की स्थिति में समयबद्ध तरीके से सुधार किया जा रहा है. निम्नलिखित रेकों का रखरखाव और उन्नयन किया जा रहा है:
एक मेमू रेक का पीओएच पूरा हो चुका है. उन्नत मेमू रेक अब घाटी में चालू है. एक अन्य मेमू रेक का पीओएच जुलाई 2025 के अंत तक पूरा होने की संभावना है. चारबाग़ वर्कशॉप में एक डेमू रेक का पीओएच पूरा हो चुका है. एक अन्य डेमू रेक का पीओएच चारबाग़ वर्कशॉप में चल रहा है. इसके अगस्त 2025 के मध्य तक पूरा होने की संभावना है. जालंधर शेड में एक और डेमू रेक का नवीनीकरण कार्य चल रहा है. इसके जुलाई 2025 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है. चारबाग वर्कशॉप और जालंधर शेड में उन्नयन के लिए चार और डेमू रेकों की योजना बनाई गई है.
उन्नयन कार्यों का विवरण इस प्रकार है:
पूरे रेक की बाहरी पीयू पेंटिंग, नए जीवंत रंग के साथ, एंटी-भित्तिचित्र के साथ
शौचालयों में जैव टैंक लगाना
शौचालयों के समुचित संचालन के लिए नए जल-उठाने वाले पंपों की स्थापना
सीटों की मरम्मत और पॉलीकार्बोनेट सीटों से प्रतिस्थापन
नए स्टैंडिंग हैंडल का प्रावधान
पीवीसी फर्श का नवीनीकरण
सभी स्टेनलेस स्टील वस्तुओं की बफिंग
सभी खिड़कियों की मरम्मत और हॉपर प्रकार की खिड़कियां सुनिश्चित करना
सार्वजनिक संबोधन एवं यात्री सूचना प्रणाली का समुचित संचालन सुनिश्चित करना
जल संग्रहण उपकरणों को आपूर्ति के लिए पर्याप्त बिजली और स्वचालित स्विच पैनल का प्रावधान। इससे गर्मी के मौसम में जनरेटर की आपूर्ति न होने पर भी जल संग्रहण उपकरणों का निर्बाध संचालन सुनिश्चित होगा.
ए और सी प्रकार के मोबाइल चार्जिंग सॉकेट (अंतर्निहित शॉर्ट सर्किट और अधिभार संरक्षण के साथ) और पंखों के लिए मॉड्यूलर स्विच का प्रावधान
सभी पंखों और लाइटों की ओवरहालिंग और नवीनीकरण
कश्मीर घाटी में यात्री डिब्बों के उन्नयन का कार्य 31 अगस्त, 2025 तक पूरा हो जाएगा. सेवा में सभी रेकों का इस समय सीमा के भीतर नवीनीकरण और उन्नयन किया जाएगा. भारतीय रेलवे को अक्सर ‘राष्ट्र की जीवन रेखा’ कहा जाता है. जम्मू-श्रीनगर रेल लाइन के खुलने और चल रहे उन्नयन कार्यों से, यह जम्मू-कश्मीर को एक नई जीवन रेखा प्रदान करेगी.
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