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गणतंत्र दिवस पर दी जाएगी 21 तोपों की सलामी, अब भारतीय 105 मिमी लाइट फील्ड गन से होगी फायरिंग

Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज को दी जाने वाली 21 तोपों की सलामी देश की सबसे बड़ी सैन्य परंपरा मानी जाती है. यह सलामी भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा दी जाने वाली सर्वोच्च सम्मान की निशानी है. इस बार भी कर्तव्य पथ के लॉन से यह ऐतिहासिक परंपरा निभाई जाएगी.

स्वदेशी तोपों का इस्तेमाल

पहले इस सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल होता था. लेकिन अब उनकी जगह पूरी तरह से भारत में बनी 105 मिमी लाइट फील्ड गन ने ले ली है. यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है और भारतीय रक्षा निर्माण क्षमता को दुनिया के सामने पेश करता है.

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि 105 मिमी लाइट फील्ड गन के इस्तेमाल से परंपरा को आधुनिक रूप मिला है. यह न केवल भारतीय सेना के आत्मविश्वास को दर्शाता है बल्कि यह संदेश भी देता है कि देश अपनी रक्षा प्रणालियों में पूरी तरह सक्षम है.

अनुशासन और गरिमा का प्रतीक

गणतंत्र दिवस पर होने वाला यह समारोह भारतीय सेना की सटीकता और अनुशासन का उदाहरण है. हर क्षण बेहद गरिमामय होता है. सलामी के दौरान प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा ध्वज आरोहण, सेना के बैंड द्वारा राष्ट्रगान और प्रेसिडेंट्स बॉडी गार्ड द्वारा राष्ट्रीय सलामी एक साथ होती है.

1721 फील्ड बैटरी की भूमिका

दिल्ली में तैनात 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) इस परंपरा को निभाती है. यह यूनिट देश के सबसे महत्वपूर्ण मौकों पर तोपों की सलामी देती है. इनमें गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, शहीद दिवस और राष्ट्रपति भवन में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत शामिल है. यह बैटरी 172 फील्ड रेजिमेंट का हिस्सा है और पहले 36 आर्टिलरी ब्रिगेड के अधीन रही है.

ऐतिहासिक बदलाव

कुछ साल पहले तक सलामी ब्रिटिश काल की तोपों से दी जाती थी. लेकिन अब भारतीय सेना ने आधुनिक और स्वदेशी तोपों को अपनाया है. यह बदलाव भारत की सैन्य परंपराओं को नई दिशा देता है और आत्मनिर्भरता का मजबूत संदेश देता है.

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सलामी का महत्व

21 तोपों की सलामी सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि भारत की सैन्य शक्ति और गौरव का प्रतीक है. 105 मिमी लाइट फील्ड गन की गूंज यह बताती है कि भारतीय सेना आधुनिक, सक्षम और आत्मनिर्भर है. यह सलामी न केवल देशवासियों को गर्व का अहसास कराती है बल्कि दुनिया को भी भारत की ताकत दिखाती है.

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-भारत एक्सप्रेस

Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

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