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ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत की सक्रिय कूटनीति, विदेश मंत्री जयशंकर ने दोनो देशो से की बात

Israel Iran Conflict: पश्चिम एशिया में कल जो हुआ है, उसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं. इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहां से हालात कभी भी बेकाबू हो सकते हैं. इस विस्फोटक स्थिति के बीच भारत ने अपनी सक्रिय कूटनीति (Diplomacy) का परिचय देते हुए शांति की अपील की है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को इजरायल और ईरान दोनों ही देशों के अपने समकक्षों से फोन पर लंबी बातचीत की और यह साफ कर दिया कि भारत इस तनाव से बेहद चिंतित है.

भारत की ‘बीच-बचाव’ वाली कूटनीति

जब दुनिया दो धड़ों में बंटती दिख रही है, तब भारत का रुख बेहद संतुलित रहा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सा’आर से अलग-अलग बात की. उन्होंने दोनों ही देशों को याद दिलाया कि इस समय सबसे ज्यादा जरूरी ‘संयम’ और ‘संवाद’ है. कूटनीतिक भाषा में कहें तो, भारत ने दोनों पक्षों से साफ कह दिया है कि सैन्य टकराव किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह स्थिति को और ज्यादा अस्थिर कर देगा.

क्यों गरमाया मामला?

यह पूरा विवाद तब और गहरा हो गया जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के ठिकानों पर एक बड़ा अभियान चलाया, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है. इसके जवाब में ईरान ने भी चुप बैठने के बजाय मिसाइल दागकर पलटवार किया, जिससे खाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ दुनिया भर के बाजारों और सुरक्षा ढांचे पर असर पड़ा है.

ईरान ने इस हमले को लेकर कड़े तेवर अपनाए हैं, जबकि अमेरिका ने ईरान में शासन परिवर्तन (regime change) की बात छेड़कर आग में घी डालने का काम किया है. दोनों तरफ से मिल रही धमकियां इस बात का संकेत हैं कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह इलाका एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आग में झुलस सकता है.

भारत के लिए चिंता क्यों जरूरी?

भारत का पश्चिम एशिया में हित और रिश्ता दोनों ही बहुत गहरे हैं. एक तरफ इजरायल के साथ हमारी दोस्ती है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ हमारे सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध हैं. भारत के लिए इस क्षेत्र की स्थिरता सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक तौर पर भी जरूरी है. वहां रह रहे भारतीय नागरिक, तेल की आपूर्ति और सुरक्षित व्यापारिक रास्ते सब कुछ इस तनाव से प्रभावित हो सकते हैं.

ये भी पढ़ें: इजरायल में PM मोदी की यात्रा एक फेस्टिवल की तरह सेलिब्रेट की गई, राजदूत बोले- अलग अलग सेक्टर्स में हुए 16 एग्रीमेंट

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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