प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय इजरायल दौरा सिर्फ एक औपचारिक विदेश यात्रा नहीं था, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में एक नई ऊर्जा भरने वाला मौका साबित हुआ. इजरायल में भारत के राजदूत जे.पी. सिंह ने इस दो दिवसीय दौरे को हर मायने में ऐतिहासिक बताया. उनके मुताबिक, जिस तरह से इजरायल की जनता ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया, वह किसी बड़े त्योहार से कम नहीं था.
राजदूत ने बताया कि इजरायल की संसद में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को खास सराहना मिली. वहां उन्हें जो सम्मान मिला, उसने साफ कर दिया कि दोनों देशों के बीच भरोसा और आपसी सम्मान पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है. यह सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि रिश्तों की गहराई का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था.
इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि भारत और इजरायल के रिश्ते अब “स्पेशल स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप” के स्तर पर पहुंच गए हैं. दोनों देशों ने मिलकर 16 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए. विज्ञान और तकनीक इस बार खास फोकस में रहे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.
खासतौर पर एआई के क्षेत्र में दो समझौते हुए, जिनमें से एक शिक्षा में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने से जुड़ा है. इसका मकसद है कि नई तकनीक का फायदा आम लोगों तक पहुंचे, सिर्फ बड़े शहरों या कंपनियों तक सीमित ना रहे.
साइबर सुरक्षा और इनोवेशन पर जोर
आज के दौर में साइबर खतरे पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय हैं. ऐसे में भारत और इजरायल ने मिलकर इस क्षेत्र में मजबूत ढांचा बनाने पर सहमति जताई है. इजरायल को रिसर्च और इनोवेशन में महारत हासिल है, जबकि भारत के पास बड़ा टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम है. दोनों की ताकत मिलकर बड़े बदलाव की जमीन तैयार कर सकती है.
आम आदमी को क्या मिलेगा?
‘सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस’ को बढ़ाने पर जोर दिया गया ताकि छोटे किसानों को नई तकनीक और बेहतर पैदावार का लाभ मिल सके. इजरायल अपनी एडवांस खेती के लिए जाना जाता है. समझौते के तहत ‘सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस’ को बढ़ाया जाएगा, जिससे छोटे किसानों की पैदावार और कमाई दोनों में इजाफा होगा.
अब भारत और इजरायल के बीच लेन-देन और भी आसान होने वाला है. यूपीआई (UPI) को लेकर हुए समझौते के बाद फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की राहें खुल गई हैं. साथ ही, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने जल्द से जल्द फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को पूरा करने के निर्देश दिए हैं.
रक्षा और संस्कृति का संगम
रक्षा के क्षेत्र में तो दोनों देश सालों से साथ हैं, लेकिन अब इस सहयोग को और भी गहराई दी जाएगी. सिर्फ हथियार या तकनीक नहीं, बल्कि अब दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक मेलजोल बढ़ाने पर भी फोकस किया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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