क्या जागेगा प्रशासन?
Satya Niketan Building Collapse Update: दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला अवैध पीजी इमारत ढहने से 7 छात्रों की मौत हो गई. बेसमेंट की अवैध खुदाई और नियमों की अनदेखी के बाद बिल्डिंग मालिक पर FIR दर्ज हो चुकी है और MCD ने सीलिंग के आदेश भी जारी कर दिए हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अपनी जगह कायम है उन 7 बच्चों की मौत का असली जिम्मेदार कौन है?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर हुआ यह हादसा केवल एक इमारत का गिरना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, मुनाफाखोरी और भ्रष्ट व्यवस्था के गठजोड़ का दर्दनाक परिणाम है.
55 वर्ग गज के छोटे से प्लॉट पर खड़ी 5 मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत ‘हॉस्टल डेज़’ अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई. इस भीषण त्रासदी में 7 मासूम छात्रों की जान चली गई, जबकि 11 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया. एम्स जेपीएन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के मुताबिक 5 छात्रों को मृत अवस्था में लाया गया था, जबकि एक गंभीर रूप से घायल छात्र ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
घटनास्थल पर एनडीआरएफ (NDRF) की विशेष टीमें, स्निफर डॉग्स, दिल्ली फायर सर्विसेज और स्थानीय पुलिस मलबे में दबे संभावित लोगों की तलाश में दिन-रात जुटी हैं. कटर और बुलडोजर से मलबा हटाने का काम चल रहा है, लेकिन मलबे के साथ राजधानी के अवैध पीजी कारोबार और नगर निगम की जवाबदेही के चिथड़े भी उड़ चुके हैं.
शुरुआती जांच, स्थानीय निवासियों और चश्मदीदों के बयानों से जो सच सामने आया है, वह रोंगटे खड़े करने वाला है. 1990 के दशक के आखिर में बनी यह इमारत करीब 40 साल पुरानी थी. 55 वर्ग गज के रिसेटलमेंट प्लॉट पर खड़ी इस कमजोर संरचना पर पहले 4 मंजिलें तानी गईं और फिर करीब दो साल पहले बिना किसी कानूनी मंजूरी के अतिरिक्त फ्लोर जोड़ दिए गए.
इतना ही नहीं, पिछले करीब एक हफ्ते से इमारत के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में भारी कमर्शियल स्पेस तैयार करने के लिए बिना किसी स्ट्रक्चरल असेसमेंट के तोड़फोड़ और खुदाई का काम चल रहा था. ऊपरी पांच मंजिलों के भारी दबाव के बीच, बिना किसी वैज्ञानिक तकनीक या ‘अंडरपिनिंग’ सपोर्ट के 8 से 10 फीट गहरी मिट्टी हटा दी गई. नींव के मुख्य लोड-बेयरिंग पिलर्स खोखले हो गए और वे 5 मंजिलों का भार नहीं संभाल सके, जिसके चलते यह जानलेवा हादसा हुआ.
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने संपत्ति के मालिक आनंद बंसल, हरि राम बंसल और आजाद बंसल सहित अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इन मालिकों ने इमारत को ‘हॉस्टल डेज़’ नाम की कंपनी को लीज पर दे रखा था. इस पीजी में रहने वाले छात्रों से प्रति बेड ₹14,000 से ₹18,000 तक का भारी-भरकम किराया वसूला जा रहा था, लेकिन सुरक्षा के नाम पर व्यवस्था पूरी तरह शून्य थी.
हादसे के बाद चौतरफा घिरी दिल्ली नगर निगम (MCD) ने आनन-फानन में सख्त रुख दिखाते हुए कुछ आदेश जारी किए. हालांकि, अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में एमसीडी ने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि इस प्रॉपर्टी (P-14) के संबंध में उसके पास अवैध निर्माण या बेसमेंट खुदाई की कोई पूर्व लिखित शिकायत या बुकिंग का रिकॉर्ड दर्ज नहीं था.
दिल्ली यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज़ (UBBL), 2016 और दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के क्लॉज 7.4 के अनुसार, पहले से बनी किसी भी इमारत के नीचे बेसमेंट की खुदाई करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और प्रतिबंधित है.
संशोधित प्लान और NOC अनिवार्य: किसी भी ढांचे में बदलाव से पहले नगर निगम से संशोधित नक्शा पास कराना, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट लेना और फायर विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होता है.
अंडरपिनिंग तकनीक की अनदेखी: सिविल और स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स के अनुसार, यदि किसी पुरानी इमारत के नीचे बेसमेंट का काम करना भी हो तो जैक और कंक्रीट सपोर्ट के साथ छोटे-छोटे हिस्सों में ‘अंडरपिनिंग’ तकनीक अपनाई जाती है. बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञ के सीधे जेसीबी और फावड़ा चलाना सीधे तौर पर जान जोखिम में डालना है.
फील्ड स्टाफ की नाकामी: खुद एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि खड़ी इमारत के नीचे बेसमेंट की अनुमति किसी सूरत में नहीं दी जा सकती. घनी आबादी के बीच खुलेआम चल रही इस खुदाई को न पकड़ पाना सीधे तौर पर फील्ड अधिकारियों और सतर्कता अमले की आपराधिक विफलता है.
1970 के दशक में बसाई गई 299 घरों वाली रिसेटलमेंट कॉलोनी सत्य निकेतन आज अनियंत्रित और अवैध पीजी हब में तब्दील हो चुकी है. 15 वर्षों में यह चौथी ऐसी घटना है; साल 2022 में भी हुए एक हादसे में 2 लोगों की जान गई थी. इस बार 7 छात्रों की मौत के बाद पूरा सिस्टम कटघरे में है और 5 सीधे सवाल पूछे जा रहे हैं.
1. क्या बिना परमिशन अवैध रूप से जोड़े गए थे अतिरिक्त फ्लोर?
55 वर्ग गज के रिसेटलमेंट प्लॉट पर बेसमेंट और ग्राउंड के ऊपर अवैध रूप से पांचवीं मंजिल तक का ढांचा तन गया. घनी आबादी वाले इलाके में बिना मंजूरी इतना बड़ा निर्माण कैसे खड़ा हुआ और स्थानीय प्रशासन आंख मूंदकर क्यों बैठा रहा?
2. बिना स्ट्रक्चरल असेसमेंट के कैसे चल रहा था रिपेयरिंग और खुदाई का काम?
इमारत में पहले से सीलन और दरारें साफ दिख रही थीं. ऐसे में क्या बेसमेंट की खुदाई और पिलर से छेड़छाड़ करने से पहले किसी क्वालिफाइड स्ट्रक्चरल इंजीनियर से जांच कराई गई थी? अगर नहीं, तो इसका जिम्मेदार कौन है?
3. सुरक्षा मानकों और इमरजेंसी एग्जिट की अनदेखी की जवाबदेही किसकी?
छात्रों से 14 से 18 हजार प्रति बेड किराया वसूलने वाले इस पीजी में न कोई इमरजेंसी एग्जिट था और न ही कोई फायर सेफ्टी मानक. छात्रों की सुरक्षा को ताक पर रखकर कमाई करने वाली कंपनी और मकान मालिक पर पहले नजर क्यों नहीं रखी गई?
4. 15 सालों में 4 हादसे: क्या पुरानी त्रासदियों से कोई सबक नहीं लिया गया?
उसी इलाके में बार-बार हो रहे हादसों और 2022 में दो मौतों के बावजूद जर्जर व पुरानी इमारतों का नियमित स्ट्रक्चरल और फायर सेफ्टी ऑडिट क्यों नहीं कराया गया?
5. दिखती दरारों और खुले निर्माण पर क्यों सोता रहा नगर निगम?
एमसीडी का कहना है कि उसके पास कोई लिखित शिकायत नहीं आई थी. सवाल यह उठता है कि क्या घनी आबादी वाले छात्र इलाकों में जानलेवा निर्माण रोकने के लिए प्रशासन को हमेशा लिखित अर्जी और बेगुनाह बच्चों की लाशों का इंतजार रहता है?
सत्य निकेतन की यह त्रासदी साफ दिखाती है कि अब केवल बयानबाजी, बैठकों और औपचारिक सीलिंग से काम नहीं चलेगा. जब तक भ्रष्ट अधिकारियों और बेपरवाह मकान मालिकों के खिलाफ नजीर बनने वाली कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसी त्रासदियों पर सिर्फ चर्चा ही होती रहेगी.
AI Productivity Tools 2026: भागदौड़ भरी जिंदगी में समय की कमी को दूर करने के…
Navratri Special Recipe: नवरात्रि व्रत में बोरिंग साबूदाना खिचड़ी की जगह इस बार ट्राई करें…
Gold Price Today: इस हफ्ते सोने के दाम में 3,000 रुपए और चांदी की कीमत…
Ghaziabad Police Encounter: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित विजयनगर इलाके में पुलिस और बदमाशों के…
मौसम विभाग (IMD) ने 18 अक्टूबर को देश के कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी…
France Protests: फ्रांस में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ हुए देशव्यापी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप…