PM Modi China Visit: सात सालों से भी अधिक समय के अंतराल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (30 अगस्त, 2025) को चीन पहुंचे. प्रधानमंत्री अपनी दो-देशों की यात्रा के दूसरे और अंतिम चरण में जापान से चीनी शहर तियानजिन पहुंचे हैं.
प्रधानमंत्री की इस यात्रा पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं. यह यात्रा अमेरिका की टैरिफ नीतियों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में अचानक आई खटास के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण है.
पीएम मोदी मुख्य रूप से 31 अगस्त और 1 सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन (SCO Summit 2025) में भाग लेने के लिए चीन आए हैं. रविवार (31 अगस्त) को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी निर्धारित बैठक अमेरिका के टैरिफ विवाद के मद्देनजर और भी महत्वपूर्ण हो गई है, जिसका असर दुनिया भर की लगभग सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है.
इस वार्ता में पीएम मोदी और शी जिनपिंग भारत-चीन आर्थिक संबंधों का जायजा लेंगे और पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद गंभीर तनाव में आए संबंधों को और सामान्य बनाने के कदमों पर विचार-विमर्श करेंगे.
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार जून 2018 में एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन का दौरा किया था. वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अक्टूबर 2019 में दूसरे “अनौपचारिक शिखर सम्मेलन” के लिए भारत का दौरा किया था.
SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और कई अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने की भी उम्मीद है.
तियानजिन की अपनी यात्रा से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है. जापान के योमिउरी शिंबुन को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “विश्व अर्थव्यवस्था में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए, दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन का विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना भी महत्वपूर्ण है.”
चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के एक पखवाड़े से भी कम समय बाद प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा हो रही है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ चीनी विदेश मंत्री वांग यी की व्यापक वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने अपने बीच “स्थिर, सहयोगात्मक और दूरदर्शी” संबंधों के लिए कई उपायों की घोषणा की.
इनमें विवादित सीमा पर शांति बनाए रखना, सीमा व्यापार को फिर से खोलना और जल्द से जल्द सीधी उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू करना शामिल था.
जून 2020 में गलवान घाटी (Galwan Clash) में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई घातक झड़पों के बाद दोनों देशों के संबंध गंभीर तनाव के दौर से गुज़र रहे थे. पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों ने अपने संबंधों को फिर से स्थापित करने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं.
पिछले साल 21 अक्टूबर को हुए एक समझौते के तहत डेमचोक और देपसांग के अंतिम दो टकराव बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्वी लद्दाख में गतिरोध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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