Shahdol District Hospital Fraud: शहडोल/अनिल पाण्डेय: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले का मुख्य चिकित्सालय एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते विवादों के घेरे में है. यहाँ के एक सरकारी सर्जन पर आरोप लगा है कि उन्होंने एक गरीब मरीज की जान बचाने के बदले मोटी रकम की रिश्वत ली. यह घटना न केवल डॉक्टर के पेशे को कलंकित करती है, बल्कि जिला अस्पताल प्रबंधन की निगरानी पर भी सवालिया निशान लगाती है.
मिली जानकारी के अनुसार, धनपुरी निवासी शिराजुद्दीन ने अपनी बीमार पत्नी को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था. इलाज के दौरान ऑपरेशन की जरूरत पड़ने पर अस्पताल के सर्जन डॉ. वीपी पटेल ने कथित तौर पर ऑपरेशन करने के एवज में 25 हजार रुपये की मांग की. पीड़ित परिवार, जो पहले से ही बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, इस भारी-भरकम राशि की मांग सुनकर दंग रह गया.
परिजनों का आरोप है कि 12 फरवरी को महिला का ऑपरेशन होना तय था, लेकिन डॉक्टर ने साफ कह दिया कि जब तक 25 हजार रुपये नकद नहीं मिलेंगे, वे ऑपरेशन टेबल तक नहीं जाएंगे. काफी मिन्नतें करने के बाद परिजनों ने किसी तरह पैसों का इंतजाम किया और ऑपरेशन के बाद डॉक्टर को नकद राशि सौंप दी.
हैरान करने वाली बात यह है कि ऑपरेशन के 22 दिन बीत जाने के बाद भी मरीज की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ है. अब डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करने का दबाव बना रहे हैं.
यह पहली बार नहीं है जब डॉ. वीपी पटेल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों. स्थानीय लोगों और पूर्व मरीजों का कहना है कि डॉक्टर के खिलाफ पहले भी अवैध वसूली की शिकायतें सिविल सर्जन तक पहुँची हैं. बावजूद इसके, विभाग की ओर से कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे डॉक्टर के हौसले बुलंद हैं. अस्पताल की कार्यप्रणाली अब गरीब मरीजों के लिए ‘कोढ़ में खाज’ साबित हो रही है.
इस पूरे मामले में पीड़ित पक्ष ने जिला अस्पताल की सिविल सर्जन शिल्पी सराफ से लिखित शिकायत की है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि वे अब जांच के नाम पर होने वाली लीपापोती से डरे हुए हैं.
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सरकारी अस्पतालों का निर्माण समाज के उस वर्ग के लिए किया गया है जो निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकता. लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो आम आदमी कहाँ जाए? शहडोल जिला अस्पताल की यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करती है. अब देखना यह है कि प्रशासन पीड़ित को न्याय दिलाता है या एक बार फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है.
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