देश

दिल्ली सीमा पर ‘रेड अलर्ट’: CJP प्रदर्शन के बाद शंभू बॉर्डर पर किसानों का जमावड़ा, सरकार की बढ़ी टेंशन

Farmers Protest Shambhu Border: दिल्ली में कल हुए CJP के प्रदर्शन के बाद अब पंजाब से बड़ी संख्या में किसान मंगलवार (21 जुलाई) को शंभू बॉर्डर पर जुट रहे हैं. उनका मकसद दिल्ली की ओर कूच करना है. इस प्रदर्शन का केंद्र भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है, जिसका किसान संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि यदि यह समझौता लागू हुआ तो इसका सबसे बड़ा असर देश के कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

दिल्ली कूच के ऐलान के बाद प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है. शंभू बॉर्डर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है और दोनों ओर की सड़कों पर बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 163 भी लागू कर दी गई है. फिलहाल इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है.

चढ़ूनी की हिरासत के बाद बढ़ी चर्चा

इस आंदोलन से पहले सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को हरियाणा पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. बताया गया कि वह दिल्ली में आयोजित होने वाली किसान महापंचायत में शामिल होने जा रहे थे. इस कार्रवाई के बाद किसान संगठनों में नाराजगी और बढ़ गई है. कई संगठनों ने इसे किसानों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है.

पंजाब के कई जिलों से रवाना हुए किसान

अमृतसर, गुरदासपुर और पंजाब के अन्य इलाकों से किसानों के जत्थे शंभू बॉर्डर पहुंच रहे हैं. बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और अन्य वाहन भी आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हुए हैं. किसानों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे.


ये भी पढ़ें: CJP के ‘संसद चलो’ मार्च में हिंसा के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन, दो थानों में FIR दर्ज


एफटीए को लेकर किसानों की सबसे बड़ी चिंता

किसान संगठनों का कहना है कि भारत-अमेरिका एफटीए लागू होने की स्थिति में विदेशी कृषि और डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में आसानी से पहुंच सकेंगे. उनका दावा है कि इससे घरेलू किसानों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा. खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों की आय पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है. किसानों का यह भी मानना है कि गांवों में कृषि और डेयरी पर निर्भर लाखों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है.

इसी वजह से आंदोलनकारी इस समझौते को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार को पहले किसानों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए, ताकि भविष्य में खेती-किसानी पर किसी तरह का संकट न आए.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

Recent Posts

दौड़ रहा है गंगा एक्सप्रेसवे! उन्नाव के एक रैंप को छोड़ कहीं जलभराव नहीं, प्रोजेक्ट मैनेजर ने दी जानकारी

देश भर में जारी भारी और असामान्य मानसूनी बारिश के बीच गंगा एक्सप्रेसवे पूरी तरह…

28 minutes ago

India’s First LNG Train Launch: अमित शाह दिखाएंगे हरी झंडी, जानिए क्या है इस डुअल-फ्यूल ट्रेन की खासियत

India First LNG Train: हाइड्रोजन के बाद अब भारतीय रेलवे देश की पहली LNG-डीजल ट्रेन…

1 hour ago

सबक नहीं सीखा क्या… UNGA के मंच से रूस ने जर्मनी को क्यों याद दिलाया दूसरा विश्व युद्ध?

Russia Germany Clash: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में रूस और जर्मनी आमने-सामने आ गए हैं.…

2 hours ago

UP से लेकर छत्तीसगढ़ और बिहार तक…14 राज्यों में मचा हाहाकार, क्या है ये राक्षसी ‘Cyclone Arnab’?

Cyclone Arnab Kya Hai: बंगाल की खाड़ी से उठे मौसमी सिस्टम ‘अर्नब’ के असर से…

2 hours ago

UPSC Recruitment 2026: केंद्र सरकार में अफसर बनने का बड़ा मौका, 13 स्पेशलिस्ट पदों पर निकली भर्ती

UPSC Recruitment 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन में…

2 hours ago

UN में वीटो पावर दिलाने उतरे पुतिन! रूस ने ठोकी भारत की दावेदारी, क्यों कांप उठा PAk?

India UNSC Permanent Seat: रूस लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और…

3 hours ago