दिल्ली भाजपा कार्यालय में शीश महल की प्रतिकृति स्थापित की गई है. यह प्रतिकृति दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के नवीनीकरण को लेकर चल रहे विवाद का हिस्सा है, जिसे अक्सर ‘शीश महल’ कहा जाता है. (फोटो: IANS)
Sheesh Mahal vs Raj Mahal: दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है. इस बार चुनावी बहस में शीश महल और राजमहल जैसे मुद्दे गरमा गए हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आम आदमी पार्टी (आप) और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि जनता के पैसों का दुरुपयोग करके ‘शीश महल’ जैसे आलीशान सरकारी आवास तैयार किए गए हैं, जिसमें बार, स्विमिंग पूल और स्पा जैसी लग्जरियस सुविधाओं के लिए करोड़ो रुपये बर्बाद किए गए. वहीं, आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री आवास में 2700 करोड़ रुपये बर्बाद करने की बात कही है.
भाजपा ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई को अपने निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया. उन्होंने केजरीवाल के आवास पर हुए खर्च को ‘राजसी ठाट-बाट’ का प्रतीक बताया और इसे ‘जनता के साथ धोखा’ करार दिया. भाजपा नेताओं ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने खुद को आम आदमी की पार्टी बताकर सत्ता में आने के बाद अपने वादों को भुला दिया है. मुख्यमंत्री आवास में अरविंद केजरीवाल के लिए सोने के पॉलिश की कमोड, बार, स्विमिंग पूल और सपा जैसी सुविधा रखी गई है.
आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि भाजपा मुद्दों से भटकाने की राजनीति कर रही है. आप का कहना है कि दिल्ली सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर अभूतपूर्व काम किया है और भाजपा इन उपलब्धियों पर चर्चा करने से बच रही है.
दिल्ली की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है. भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास को ‘शीश महल’ कहकर निशाना बनाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री आवास को राजमहल बता कर मुद्दा उठाया.
बीते दिनों आम आदमी पार्टी के नेता और सांसद संजय सिंह और दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री आवास का दौरा करने के बाद मीडिया को संबोधित किया. उन्होंने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री आवास सरकारी नियमों के तहत मरम्मत और रखरखाव के लिए धनराशि का उपयोग करता है.
इसके बाद आप नेता सांसद संजय सिंह और मंत्री सौरभ भारद्वाज ने प्रधानमंत्री आवास का दौरा करने की योजना बनाई और वहां जाकर जनता को ‘भव्यता’ दिखाने का प्रयास किया. हालांकि, उन्हें पुलिस द्वारा रास्ते में ही रोक दिया गया. आप नेताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास की सजाबट में 2700 करोड़ रुपये खर्च किया गया है.
संजय सिंह ने कहा कि भाजपा के नेता झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं. हम पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं. अगर मुख्यमंत्री आवास पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो प्रधानमंत्री आवास पर भी जनता को जानकारी दी जानी चाहिए. सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भाजपा मुद्दों से भटकाने की राजनीति कर रही है और जनता के असली सवालों जैसे महंगाई, बेरोजगारी, और बुनियादी सेवाओं की कमी से ध्यान हटा रही है.
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है. सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है, जहां लोग दोनों पक्षों के तर्कों पर अपनी राय दे रहे हैं. मुद्दे को लेकर जनता की राय भी बंटी हुई नजर आ रही है. कुछ लोग इसे अनावश्यक मुद्दा बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मामला मान रहे हैं. चुनाव नजदीक होने के कारण इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है. भाजपा और आप के बीच इस आरोप-प्रत्यारोप से यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका चुनावी परिणाम पर क्या असर पड़ता है.
-भारत एक्सप्रेस
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