महाराष्ट्र दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की जनता को खास संदेश दिया है. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखकर न सिर्फ शुभकामनाएं दीं, बल्कि महाराष्ट्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक भूमिका को पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत बताया है.
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में महाराष्ट्र को एक ऐसा राज्य बताया जहां वीरता, भक्ति, सामाजिक सुधार और राष्ट्र निर्माण की परंपराएं एक साथ देखने को मिलती हैं. उन्होंने कहा कि कोंकण के समुद्र तटों से लेकर सह्याद्रि की पहाड़ियों तक यह धरती हमेशा साहस और संघर्ष की कहानियों से भरी रही है.
पीएम मोदी ने अपने पत्र में लिखा कि महाराष्ट्र सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता और संस्कृति का मजबूत आधार है. उन्होंने कहा कि यह भूमि शौर्य, भक्ति, सामाजिक बदलाव और विकास का अद्भुत संगम है.
उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज का जिक्र करते हुए कहा कि उनका ‘स्वराज्य’ का विचार आज भी सुशासन और राष्ट्र गर्व की प्रेरणा देता है. साथ ही डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को लोकतंत्र की मजबूत नींव बताया. लोकमान्य तिलक, वीर सावरकर और संत परंपराओं को भी उन्होंने महाराष्ट्र की आत्मा को आकार देने वाला बताया है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह साल महाराष्ट्र के लिए खास है क्योंकि कई महान व्यक्तित्वों और घटनाओं की याद जुड़ी है. उन्होंने कहा कि इन सभी घटनाओं ने महाराष्ट्र को सामाजिक न्याय, समानता और सुधार की दिशा में मजबूत बनाया है. पीएम मोदी ने महाराष्ट्र को देश की आर्थिक रीढ़ बताया. उन्होंने कहा कि उद्योग, वित्त, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग हर क्षेत्र में राज्य ने बड़ी भूमिका निभाई है.
उन्होंने बताया कि 2025-26 में रेलवे परियोजनाओं के लिए 24,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो एक रिकॉर्ड है. नवी मुंबई एयरपोर्ट, मुंबई मेट्रो विस्तार और वधावन पोर्ट जैसी परियोजनाएं राज्य की तस्वीर बदल रही हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब गढ़चिरौली, अमरावती, धुले और नंदुरबार जैसे क्षेत्र भी निवेश के नए केंद्र बन रहे हैं. कभी जिन इलाकों को पिछड़ा माना जाता था, आज वहीं विकास की नई कहानी लिखी जा रही है.
उन्होंने यह भी कहा कि मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलना और मराठा किलों का यूनेस्को में शामिल होना महाराष्ट्र के लिए गर्व की बात है.
पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के किसानों की सराहना करते हुए कहा कि सहकारी आंदोलन और कृषि क्षेत्र में उनका योगदान पूरे देश के लिए उदाहरण है. उन्होंने आगामी कुंभ मेले और त्र्यंबकेश्वर विकास परियोजनाओं का भी जिक्र किया.
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-भारत एक्सप्रेस
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