केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की एक अहम जीत बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की जीत है जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठाई और लगातार लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया.
वांगचुक ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह जीत सीधे जनता के बीच से निकले लोकतांत्रिक आंदोलन की है. उनके मुताबिक, शांति, धैर्य और लगातार किए गए प्रयासों ने आखिरकार असर दिखाया. उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), देश की जेन जी पीढ़ी और उन सभी नागरिकों को बधाई दी जिन्होंने डर के माहौल से ऊपर उठकर देशभर में अपनी बात मजबूती से रखी.
उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि अब केवल जवाबदेही तय करने का समय नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है.
सोनम वांगचुक का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पूरे देश में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे थे. दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में लगातार प्रदर्शन जारी था. छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर कई सवाल उठाए थे.
अपने इस्तीफे के साथ धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश भेजते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा हमेशा उनके जीवन की सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है. उन्होंने बताया कि पिछले चार दशकों से वे छात्र हित, शिक्षकों के सम्मान और शिक्षा सुधार के लिए लगातार काम करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं की उम्मीदों और उनके न्यायसंगत अधिकारों का सम्मान करना उनके सार्वजनिक जीवन का मूल उद्देश्य रहा है.
प्रधान ने यह भी स्वीकार किया कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं. इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी. साथ ही परीक्षा रद्द करने और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय भी लिया गया.
धर्मेंद्र प्रधान ने जानकारी दी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किया जा रहा हैं. उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से नीट परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में आयोजित की जाएगी, ताकि परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बन सके.
उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही उन्होंने पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी उससे पीछे नहीं हटे. उनका उद्देश्य केवल इतना था कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेहनती और प्रतिभाशाली छात्र का भविष्य प्रभावित न हो.
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने जंतर-मंतर पर पिछले दस दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा उनके व्यक्तिगत सम्मान या राजनीतिक छवि से कहीं बड़ा है. उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण देश के युवाओं का भविष्य है.
उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि छात्र किसी तरह के भ्रम, राजनीतिक टकराव या लंबे कानूनी विवादों में उलझें. उनका मानना है कि छात्रों का पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई और करियर पर होना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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