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‘बैरिकेडिंग और आपातकाल में फर्क है’, CJP प्रदर्शन पर बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी और विपक्ष पर वार

BJP On CJP Protest: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है. विपक्ष और CJP नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा और इसे ‘अघोषित आपातकाल’ जैसी स्थिति बताया. वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुरक्षा के लिए की गई बैरिकेडिंग की तुलना आपातकाल से करना सही नहीं है.

त्रिवेदी ने कहा कि मौजूदा हालात को 1975 में लगाए गए आपातकाल से जोड़ना इतिहास को नजरअंदाज करने जैसा है. उनके मुताबिक, उस समय सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को जेल में डाल दिया जाता था और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर गंभीर पाबंदियां लगा दी गई थीं. उन्होंने कहा कि आज की स्थिति उस दौर से बिल्कुल अलग है.

बैरिकेडिंग और आपातकाल में अंतर समझाए

सुधांशु त्रिवेदी ने प्रदर्शन के दौरान लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर विपक्ष पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि अगर किसी इलाके में सुरक्षा कारणों से एक किलोमीटर तक बैरिकेडिंग कर दी जाती है, तो विपक्ष उसे आपातकाल बताने लगता है. उनके अनुसार, किसी स्थान पर आवाजाही सीमित करना और देश में नागरिक स्वतंत्रता पर व्यापक रोक लगाना दो अलग-अलग बातें हैं.

उन्होंने 1975 के आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सरकार की आलोचना करने पर लोगों को जेल जाना पड़ सकता था. उन्होंने मौजूदा दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना किए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों को अपनी बात रखने की आजादी है. भाजपा सांसद ने इसे लोकतंत्र के सुरक्षित होने का संकेत बताया.

राहुल गांधी और विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. उनके मुताबिक, भीड़ के जरिए संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट में हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि जिस तरह प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं की मौजूदगी में स्थिति बनी, वह बेहद अनुचित था. उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ जुटाकर अदालत को प्रभावित करने और डराने की कोशिश की गई. त्रिवेदी ने कहा कि दूसरे गेट से अदालत परिसर में प्रवेश करने का प्रयास भी गंभीर सवाल खड़े करता है.


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SIR और फॉर्म-6 को लेकर जारी है विवाद

दरअसल, विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया और फॉर्म-6 में बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. इसी मुद्दे पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बाद विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया.

वहीं, भाजपा का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को आपातकाल बताकर राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है. इस पूरे विवाद ने एक बार फिर चुनाव प्रक्रिया, विरोध प्रदर्शन और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर सियासी बहस तेज कर दी है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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