Challenges For CM Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल में शनिवार से एक नए युग का सूर्योदय हो गया. राज्य के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार का गठन किया. ममता बनर्जी को नंदीग्राम (2021) और अब उनके ही सबसे सुरक्षित गढ़ भवानीपुर (2026) में धूल चटाने वाले शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री बने. लेकिन, सियासत का यह ‘ताज’ शुभेंदु अधिकारी के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाला है. बंगाल लंबे समय से राजनीतिक खून-खराबे, सीमा सुरक्षा में सेंध, बेरोजगारी और बदहाल कानून-व्यवस्था का गवाह रहा है. आइए जानते हैं वो 5 ‘अग्निपरीक्षाएं’, जिनका सामना मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही सुवेंदु अधिकारी को करना पड़ेगा.
बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध और खस्ताहाल लॉ एंड ऑर्डर चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा था. NCRB 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 34,691 मामले दर्ज हुए. इनमें से 35% मामले सिर्फ रेप के थे और हत्या के मामले 20% थे.
9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए रेप-मर्डर ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इससे पहले 5 जनवरी 2024 को ED पर हमले के बाद संदेशखाली में TMC के बाहुबली शेख शाहजहां के गुर्गों द्वारा महिलाओं के यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के मामलों ने पुलिस सिस्टम पर से जनता का भरोसा उठा दिया है. शुभेंदु की सबसे पहली चुनौती महिलाओं को सुरक्षा का अहसास कराना और पुलिस तंत्र को निष्पक्ष बनाना है.
बंगाल में दशकों से वामपंथ और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर विरोधियों को कुचलने के लिए ‘कैडर’ का इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहे हैं. हालिया चुनाव नतीजों के तुरंत बाद शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या, उत्तर दिनाजपुर में बम की फैक्ट्री और हावड़ा के शिवपुर में बमबाजी की घटनाएं इसका जीता-जागता सबूत हैं. क्या नई BJP सरकार राजनीतिक बदले की भावना से ऊपर उठकर प्रशासन को पार्टी लाइन से अलग कर पाएगी? यह शुभेंदु के लिए एक बड़ा सवाल है.
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बांग्लादेश की सीमा से सटा होने के कारण अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी, मवेशी तस्करी और नकली नोटों का कारोबार बंगाल के लिए नासूर बन चुका है. NCRB डेटा में भी विदेशी नागरिकों के अपराधों में बंगाल का नाम प्रमुखता से रहा है. बतौर मुख्यमंत्री, शुभेंदु अधिकारी पर दबाव होगा कि वे केंद्र के साथ बेहतर तालमेल बनाकर इस घुसपैठ और ‘डेमोग्राफिक’ बदलाव को रोकें.
बंगाल जो कभी देश की औद्योगिक राजधानी हुआ करता था, आज वहां से बड़ी कंपनियां पलायन कर चुकी हैं. निवेश की कमी के चलते राज्य का युवा भयानक बेरोजगारी से जूझ रहा है. शुभेंदु अधिकारी को निवेशकों का भरोसा जीतना होगा. उन्हें दुनिया को यह मैसेज देना होगा कि बंगाल अब सिर्फ बम-हड़ताल की जगह नहीं, बल्कि IT, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक सुरक्षित ‘बिजनेस हब’ है.
शुभेंदु अधिकारी एक लंबा वक्त TMC में बिता चुके हैं, ऐसे में उनके विरोधी अक्सर उन पर सवाल उठाते हैं. उन्हें जनता को यह विश्वास दिलाना होगा कि वे सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि ‘सिस्टम’ में सुधार लाए हैं. साथ ही, दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति और बंगाल की अपनी गहरी सांस्कृतिक और क्षेत्रीय भावना के बीच एक सधा हुआ सामाजिक संतुलन बनाना उनकी सरकार के स्थायित्व की कुंजी होगा.
चुनौतियों के इस पहाड़ को देखते हुए शुभेंदु अधिकारी ने भी अपने इरादे साफ कर दिए हैं. नेता चुने जाने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया, “महिला सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. हम संदेशखाली और आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसे मामलों की जांच के लिए तुरंत आयोग बनाएंगे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी.” उन्होंने कहा कि BJP का लक्ष्य ‘डबल इंजन’ की ताकत से पश्चिम बंगाल का पुनर्निर्माण करना है. अब देखना यह है कि शुभेंदु अधिकारी इन 5 चुनौतियों के चक्रव्यूह को तोड़कर बंगाल को ‘सोनार बांग्ला’ बना पाते हैं या नहीं.
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