PM Modi: आज जब हम अपने शहरों से और ज़्यादा उम्मीदें रखते हैं तो ये भी जरूरी है कि अब तक के सफर को पहचानें. आज़ादी के बाद लंबे समय तक भारत के शहरों को नजरअंदाज किया गया. दिल्ली की सड़कों पर गड्ढे, सरकारी इमारतों की बदहाली और जाम से भरी एनसीआर की गलियां एक समय देश की राजधानी की हालत बयां करती थीं.
लेकिन 2014 के बाद तस्वीर बदलने लगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने शहरों को विकास का इंजन माना और उन्हें गर्व का प्रतीक बनाया. सेंट्रल विस्टा का कायाकल्प हुआ, नया संसद भवन बना और कर्तव्य पथ आम लोगों की जगह बन गया. 2004 से 2014 तक शहरी विकास में ₹1.57 लाख करोड़ लगे थे जबकि 2014 के बाद ये निवेश ₹28.5 लाख करोड़ तक पहुंच गया. लगभग 16 गुना बढ़ोतरी हुआ है.
मेट्रो नेटवर्क 5 शहरों से बढ़कर 23 शहरों तक फैल गया है और एक करोड़ से ज़्यादा लोग रोज सफर करते हैं. दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अटल सेतु जैसे प्रोजेक्ट्स ने कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है.
सिर्फ इमारतें नहीं, लोगों की ज़िंदगी भी बदली है. पीएम स्वनिधि योजना से 68 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी लोन मिला. पीएम आवास योजना से 94 लाख पक्के घर बन चुके हैं. PNG और CNG ने शहरों को साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाया है.
भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और G20 जैसे बड़े आयोजन सफलतापूर्वक कर रहा है. एयरपोर्ट्स की संख्या 74 से बढ़कर 160 हो गई है, और वंदे भारत ट्रेनें देशभर में दौड़ रही हैं.
ये बदलाव सिर्फ आंकड़े नहीं हैं ये करोड़ों लोगों की बदली हुई ज़िंदगी और नए सपनों की कहानी है. New Urban India अब हकीकत बन चुका है.
Also Follow Bharat Express on X
-भारत एक्सप्रेस
Pankaj kumar Pandeyमैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.