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दुनिया के सबसे उम्रदराज और प्रेरणादायक मैराथन धावक फौजा सिंह (Fauja Singh) का सोमवार को दुखद निधन हो गया. 114 वर्षीय फौजा सुबह सैर के लिए निकले थे, उसी दौरान जालंधर (Jalandhar) में एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी थी. घायल अवस्था में उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान देर रात उनका देहांत हो गया. हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया था.
जालंधर पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है. पुलिस घटनास्थल पर तो गई ही साथ ही CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है ताकि दोषी पकड़ा जा सके.
फौजा सिंह के निधन पर प्रधानमंत्री ने दुख जताया है. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि फ़ौजा सिंह जी अपने अद्वितीय व्यक्तित्व और फिटनेस जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भारत के युवाओं को प्रेरित करने के अपने तरीके के कारण असाधारण थे. वे अद्भुत दृढ़ संकल्प वाले एक असाधारण एथलीट थे. उनके निधन से बहुत दुःख हुआ. मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और दुनिया भर में उनके अनगिनत प्रशंसकों के साथ हैं.
फौजा सिंह का जन्म एक अप्रैल 1911 को पंजाब के ब्यास पिंड गांव में हुआ था. बचपन में वे इतने कमजोर थे कि 5 साल की उम्र तक चल भी नहीं पाते थे, लेकिन उन्होंने अपने हौसले से इस कमजोरी को अपनी ताकत बना लिया. विभाजन के समय के अनुभवों ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत कर दिया था..
1992 में पत्नी के निधन के बाद वे बेटे के पास लंदन (London) चले गए और वहीं से उनके जीवन का दूसरा अध्याय शुरू हुआ था. नियमित अभ्यास और दौड़ के जुनून ने उन्हें इतना ताकतवर बना दिया था कि उन्होंने 100 साल की उम्र में टोरंटो मैराथन (Toronto Marathon) पूरी कर ली थी. उन्होंने 8 घंटे 11 मिनट 6 सेकंड में दौड़ पूरी कर वर्ल्ड रिकॉर्ड (World Record) बनाया था और दुनिया के पहले ऐसे शख्स बने जिन्होंने 100 वर्ष की उम्र में मैराथन दौड़ी.
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया (Gulab Chand Kataria) ने फौजा सिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है. उन्होंने कहा कि 114 वर्ष की उम्र में वे मेरे साथ नशा मुक्त रंगला पंजाब मार्च (Rangla Punjab) में शामिल हुए थे. उनका जीवन पंजाब के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है. फौजा सिंह भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके साहस, जज्बे और समर्पण की मिसाल हमेशा याद की जाएगी.
-भारत एक्सप्रेस
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