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क्या डूब गई ममता की TMC? बंगाल में पहली बार जीते विधायक ने कुछ ही हफ्तों में कैसे जुटाए 60 बागी… जानें इनसाइड स्टोरी

Mamata Banerjee TMC Crisis: पश्चिम बंगाल में इस वक्त सबसे बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल रहा है, जहां एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के भतीजे और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है, तो दूसरी तरफ पार्टी में बगावती सुर भी तेज हो गए हैं. पार्टी के उलूबेरिया पूरबा से विधायक और अब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के नेतृत्व में बागी गुट खुद को असली TMC बता रहा है. ऐसे में इन राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए इसकी तुलना महाराष्ट्र मॉडल से भी हो रही है, जहां कुछ साल पहले एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के चलते इसी तरह का संकट खड़ा हुआ था, जिसके बाद शिवसेना और एनसीपी में बड़ी फूट पड़ी.

हालांकि महाराष्ट्र वाले मामले में एकनाथ शिंदे और अजीत पवार अपने-अपने दल में अच्छी पकड़ रखते थे और पूरी जिम्मेदारी एक तरह से उनके पास ही थी. लेकिन इस मामले में ऋतब्रत बनर्जी पहली बार विधायक चुने गए हैं, जिसके कारण उनका पार्टी में इतना बड़ा प्रभाव नहीं है और वे इतनी बड़ी बगावत को हवा नहीं दे सकते. तो आइए जानते हैं कैसे बगावती हुए पार्टी के 60 विधायक और इसके पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी.

कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी?

ऋतब्रत बनर्जी (who is Ritabrata Banerjee?) का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ. उन्होंने वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई के साथ काम करते हुए अपनी पहचान बनाई. बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और पार्टी के ट्रेड यूनियन संगठन में अहम जिम्मेदारी संभाली. राजनीतिक सक्रियता के चलते 2014 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया, जहां उन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए.

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऋतब्रत बनर्जी ने उलूबेरिया पूरबा सीट से जीत दर्ज की. इन दिनों वह टीएमसी के भीतर चल रहे असंतोष और बागी गतिविधियों के कारण चर्चा में हैं और पार्टी के अंदर उभर रहे विरोधी गुट का प्रमुख चेहरा माने जा रहे हैं.

TMC संकट के पीछे की कहानी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. पार्टी पर अपने ही विधायकों के हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल कर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष घोषित करने का आरोप लगा है. इस मामले में विधायकों संदीपान साहा और ऋतब्रता ने विधानसभा सचिवालय में शिकायत दर्ज कराई, जिसके कुछ ही घंटों बाद दोनों को पार्टी ने निष्कासित कर दिया. इसी बीच यह चर्चा भी तेज हो गई कि ऋतब्रता पार्टी के भीतर एक अलग गुट तैयार कर रहे हैं.

पार्टी की स्थिति तब और गंभीर दिखी जब ममता बनर्जी की बैठक में बड़ी संख्या में विधायक शामिल नहीं हुए और चुनावी हार के बाद हुए उनके पहले प्रदर्शन में भी बेहद कम जनप्रतिनिधि पहुंचे. इसके बाद 60 विधायकों के समर्थन का दावा करने वाले बागी गुट ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर ऋतब्रता को नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग रखी. हालांकि, इस गुट ने साफ किया कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती नहीं दे रहा है और न ही नई पार्टी बनाने की योजना है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के भीतर बढ़ता असंतोष पार्टी के लिए आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बन सकता है.

अभिषेक बनर्जी है विद्रोह का कारण?

तृणमूल कांग्रेस की शुरुआत कांग्रेस से अलग होकर हुई थी, लेकिन इसे कभी पूरी तरह किसी एक राजनीतिक विचारधारा से जुड़ी पार्टी नहीं माना गया . हाल में जो विद्रोह सामने आया है, उसमें 60 विधायकों और ऋतब्रता का असंतोष किसी खास सिद्धांत या जनता के बड़े आंदोलन से नहीं जुड़ा दिखता (Why TMC MLAs revolt).

असल में यह विरोध पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर बढ़ती नाराजगी से जुड़ा बताया जा रहा है, खासकर ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर. माना जा रहा है कि संगठन में उनके प्रभाव को लेकर असंतोष इस विवाद की एक बड़ी वजह बना है.

क्या ममता बनर्जी बचा पाएगी TMC?

तृणमूल कांग्रेस में हाल के घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि पार्टी के कई नेता किसी मजबूत विचारधारा या स्थायी निष्ठा से जुड़े नहीं रहे हैं. 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भी ऐसा देखा गया था, जब कुछ बड़े नेता जैसे मुकुल रॉय और राजीव बनर्जी पार्टी छोड़कर भाजपा में चले गए थे. लेकिन चुनाव में टीएमसी की बड़ी जीत के बाद इनमें से कई नेता वापस पार्टी में लौट आए, जिससे यह साफ हुआ कि राजनीतिक फैसले अक्सर स्थिति और सत्ता के लाभ के आधार पर बदलते रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक सायंतन घोष ने एक्स पर लिखा, “भाजपा टीएमसी के भीतर कोई शक्तिशाली वैचारिक गुट नहीं बना रही है; बल्कि एक ऐसा गुट इकट्ठा कर रही है जिसकी मुख्य विशेषता निष्ठा का अभाव है.”


ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी के हाथ से निकली TMC! 60 विधायकों ने बनाया अलग गुट, ऋतब्रत बनर्जी बने नेता प्रतिपक्ष


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मौजूदा विवाद किसी विचारधारात्मक संघर्ष से ज्यादा नेतृत्व और प्रभाव को लेकर है, जिसमें अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर असंतोष प्रमुख कारण माना जा रहा है. आरोप यह भी लगाए गए हैं कि संगठन में उनका प्रभाव बढ़ने के बाद पार्टी का नियंत्रण पहले जैसा नहीं रहा. वहीं, कुछ नेताओं का कहना है कि पार्टी को जोड़कर रखने वाला तत्व विचार नहीं बल्कि सत्ता और उसके आसपास की व्यवस्था रही है, जो हालात बदलते ही कमजोर पड़ने लगती है. ऐसे में यह देखना होगा कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी में जारी इस असंतोष को कैसे पार पाती हैं और क्या महाराष्ट्र जैसे बंगाल में भी राजनीतिक फेरबदल हो सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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