सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान देने वाले (DMK)नेता और तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने उदयनिधि के खिलाफ नई FIR दर्ज करने पर रोक लगा दिया है, साथ ही कोर्ट ने पिछली सुनवाई में दी गई राहत को बरकरार रखने का आदेश दिया है.
सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ 21 अप्रैल को अगली सुनवाई करेगा. उदयनिधि स्टालिन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि बिहार के उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ एक और नई FIR दर्ज की गई है, जिसपर कोर्ट ने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
वही मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर जिस भाषा का इस्तेमाल किया है, वही किसी अन्य राज्य के मुख्यमंत्री ने इस तरह का बयान दिया होता तो हंगामा मच गया होता.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्टालिन के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा था कि उन्हें अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल करने के बजाय स्टालिन को CRPC की धारा 406 के तहत मुकदमा दायर करना चाहिए जिसके बाद स्टालिन ने सुप्रीम कोर्ट में संशोधित याचिका दायर कर विभिन्न राज्यों में दर्ज मुकदमे को ट्रांसफर करने की मांग की है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और जम्मू कश्मीर में उनके खिलाफ जो FIR दर्ज है उसे एक साथ जोड़ दें.पिछली सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने उदयनिधि स्टालिन के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा था कि वे अनुच्छेद 19(1)(A)और अनुच्छेद 25 के अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं.
अब आप अनुच्छेद 32 के अधिकार का प्रयोग कर रहे है? क्या आप नहीं जानते कि आपने जो कहा उसका क्या परिणाम हो सकता है. कोर्ट की इस टिप्पणी पर उदयनिधि स्टालिन के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्पष्ट किया कि वह उनकी टिप्पणियों का समर्थन नहीं कर रहे हैं. सिंघवी ने यह भी बताया कि स्टालिन के खिलाफ छह राज्यों में एफआईआर दर्ज हैं, जिनका वह सामना कर रहे हैं.
इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आप एक आम नागरिक नहीं, बल्कि मंत्री हैं और आपको अपने बयानों के परिणामों की जानकारी होनी चाहिए.उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर में, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से की थी.
उनके इस बयान ने न केवल एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दिया, बल्कि उनके खिलाफ कई आपराधिक शिकायतें भी दर्ज हुईं साथ ही, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई.
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