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राधाष्टमी पर राधारानी के प्राकट्य समय को लेकर श्रद्धालुओं में खास जिज्ञासा रहती है. वैष्णव परंपरा में उनका प्राकट्य मध्याह्न काल में माना जाता है.

सनातन धर्म में ब्रह्मांड की कल्पना केवल एक दुनिया या एक आकाश तक सीमित नहीं है. भागवत पुराण समेत हिंदू ग्रंथों में असंख्य ब्रह्मांडों, अलग-अलग लोकों और भौतिक दुनिया से परे आध्यात्मिक आयामों का उल्लेख मिलता है.

भगवान श्रीकृष्ण से '8' के अंक का खास ताल्लुक रहा. पृथ्वी पर अष्टमी तिथि को मानव देह धारण करना, देवकी की 8वीं संतान बनना, बचपन में 8 सखियों संग खेलना, राजकुमार के रूप 8 पटरानियां होना और अष्टधा प्रकृति से संसार को संभालना - वे मनुष्यों में परमेश्वर के पूर्णअवतार माने गए.

SHRI KRISHNA JANMASHTAMI 2026: दुनिया भर में रह रहे 1.2 अरब से अधिक सनातन धर्मावलंबियों के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण का आज 5253वाँ जन्मोत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. जानिए बाल गोपाल के जन्मोत्सव पर उनकी सही पूजन विधि, प्रिय भोग, निशीथ काल मुहूर्त और विशेष मंत्र.

आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है. हिंदू पंचांग और वैदिक गणना के अनुसार, इस साल यह पावन त्योहार 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है. आइए समझिए, उनके अवतार का परम उद्देश्य: क्यों धरा पर पधारे स्वयं परमेश्वर?

KRISHNA JANMASHTAMI 2026 DATE & MUHURAT: इस बार भगवान श्रीकृष्ण का 5253वाँ जन्मोत्सव मनेगा. तिथि की गणना को लेकर 4 और 5 सितंबर के बीच बने भ्रम को दूर करते हुए जानिए स्मार्त और वैष्णव संप्रदाय के अनुसार सही तारीख, निशीथ काल पूजा मुहूर्त और व्रत पारण का शास्त्रसम्मत नियम.

अयोध्या में सीएम योगी ने मौलवियों द्वारा गाय को 'राष्ट्रीय पशु' बताने पर चुटकी ली. साथ ही संभल-अयोध्या का उदाहरण देते हुए समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया.

Kaward Yatra Controversy: मुजफ्फरनगर के योग साधना आश्रम के महंत स्वामी यशवीर जी महाराज ने कावड़ यात्रा में टोपी और बुर्का पहनकर कावड़ लाने वाले मुस्लिम महिला-पुरुषों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने इसे मीडिया में छाने का ढोंग बताते हुए सनातनियों से इसका विरोध करने की अपील की है.

Sanatan Dharma news: गुजरात के छोटा उदेपुर में आयोजित कार्यक्रम में 25 आदिवासी-वनवासी लोगों ने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाने का संकल्प लिया. कार्यक्रम में शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती मौजूद रहे.

Pashupatastra Astra: पाशुपतास्त्र भगवान शिव की दिव्य शक्ति का प्रतीक था. इसे पाने के लिए केवल शौर्य नहीं, बल्कि तप, संयम और भक्ति की भी आवश्यकता थी. आज भी यह अस्त्र भारतीय पौराणिक कथाओं में रहस्य और शक्ति का प्रतीक बना हुआ है.