Union Budget 2026: बजट के दिन देश की निगाहें जहां आर्थिक घोषणाओं और आंकड़ों पर टिकी होती हैं, वहीं एक नजर वित्त मंत्री के पहनावे पर भी रहती है. रविवार, 1 फरवरी 2026 को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां बजट पेश करने संसद भवन पहुंचीं, तो उनकी वेशभूषा ने एक बार फिर एक बड़ा राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश दिया. उन्होंने इस ऐतिहासिक मौके के लिए तमिलनाडु की विश्व प्रसिद्ध कांजीवरम साड़ी का चुनाव किया, जो न केवल भारतीय हैंडलूम की भव्यता को दर्शाती है, बल्कि इसके तार सीधे आने वाले विधानसभा चुनावों से भी जुड़े हैं.
वित्त मंत्री का यह चुनाव महज फैशन या परंपरा तक सीमित नहीं माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इसके पीछे एक गहरा सियासी मकसद छिपा है. दरअसल, कुछ ही महीनों में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. बीजेपी पिछले लंबे समय से दक्षिण के इस किले को भेदने और वहां अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है. ऐसे में, तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली ‘कांजीवरम’ को पहनकर निर्मला सीतारमण ने राज्य के बुनकरों, संस्कृति और मतदाताओं के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश की है.
यह पहली बार नहीं है जब निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के लिए किसी विशिष्ट क्षेत्र की साड़ी को चुना हो. इसे उनकी ‘साड़ी डिप्लोमेसी’ या ‘सॉफ्ट पावर’ का हिस्सा माना जाता है. इससे पहले भी उन्होंने ओडिशा की ‘संबलपुरी’ और ‘बोमकाई’ साड़ियां पहनी थीं, जब वहां चुनावों की चर्चा थी. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान उन्हें लाल-पाड़ वाली साड़ी और कर्नाटक के समय धारवाड़ की साड़ियों में देखा गया था. हर बार उनका परिधान उस राज्य की कला और हस्तशिल्प के प्रति सम्मान व्यक्त करता है.
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कांजीवरम साड़ियों को ‘साड़ियों की रानी’ कहा जाता है. अपनी मजबूती, चमक और जरी के काम के लिए मशहूर यह साड़ी तमिलनाडु के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है. आज जब वित्त मंत्री ने लाल टैबलेट (बही-खाता) के साथ इस साड़ी में संसद में प्रवेश किया, तो उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि केंद्र सरकार की नजर दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु के विकास और उसकी विरासत पर है. संसद के गलियारों में चर्चा है कि वित्त मंत्री ने अपने बजट के ‘बही-खाते’ में तमिलनाडु को जो मिला वो अलग बात है. लेकिन उन्होंने अपनी वेशभूषा से ‘चुनावी बिगुल’ जरूर फूंक दिया है.
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