उपेंद्र कुशवाहा
Bihar: बिहार की राजनीति अब एक नई करवट ले रही है. सूबे के मुखिया सीएम नीतीश कुमार गठबंधन को एकजुट रखने के लिए लगातार मशक्कत करते नजर आ रहे हैं. लेकिन अपनी ही पार्टी में उठ रहे विद्रोह को वे किस तरह साधते हैं, यह भी देखने लायक होगा. वर्तामान में उनकी पार्टी के उपेंद्र कुशवाहा ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है. कहा जा रहा है कि नीतीश से उनका मोहभंग हो चुका है. अब उन्होंने एक बार फिर जेडीयू को अलविदा कह दिया है.
उपेंद्र कुशवाहा अब तक अपना साढ़े तीन दशक का सियासी सफर पूरा कर चुके हैं. ऐसे में उन्होंने राजनीति के तमाम रंग देखे हैं. दो बार JDU छोड़ा भी और अपनी नई पार्टी भी बनाई. हालांकि अपने सियासी सफर में कुशवाहा सिर्फ दो ही बार चुनाव जीत सके हैं. इनमें लोकसभ और विधानसभा दोनों शामिल है.
साल 2000 में कुशवाहा जहां समता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर वैशाली की जंदाहा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने काराकाट सीट से जीत हासिल की थी. हालांकि वे विधान परिषद और राज्यसभा सदस्य के तौर पर किसी न किसी सदन का हिस्सा बने रहे.
कभी NDA कभी RJD तो कभी अन्य पार्टियों का थामा दामन
एनडीए का साथ छोड़ने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने RJD का भी दामन थामा. परंतु विधानसभा चुनाव के दौरान सीटों के बंटवारे पर राजद से सहमति नहीं बन पाई. उपेंद्र कुशवाहा ने बीएसपी, एआईएमआईएम एसजेडीपी, ओपी राजभर की पार्टी के साथ मिलकर तीसरा मोर्चा बनाकर चुनाव भी लड़ा. इस मोर्चे का नाम उन्होंने ग्रैंड डेमोक्रिटिक सेक्युलर फ्रंट रखा था और सीएम फेस बने.
पार्टी का किया जेडीयू में विलय
14 मार्च 2021 को अपनी पार्टी आरएलएसपी का जेडीयू में विलय कर दिया था. नीतीश ने जिस वक्त उन्हें लिया था, उस समय उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक हैसियत काफी कमजोर हो चुकी थी. उनके पास न किसी तरह की कोई सीट नहीं थी. नीतीश कुमार ने भी कुशवाहा को गले लगाया और उन्हें राज्यपाल कोटे से एमएलसी बना दिया गया.
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जेडीयू से दिया इस्तीफा
वहीं जेडीयू के तमाम पदों से इस्तीफा देने के बाद आज उन्होंने राष्ट्रीय लोक जनता दल के नाम से उन्होंने नई पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है. इसके साथ ही अब वे बिहार चुनाव में एक नई पार्टी के साथ जनता के सामने वोट मांगेंगे.
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