West Champaran baby murder case
West Champaran baby murder case: बच्चों के लिए मां की गोद को दुनिया का सबसे सुरक्षित आशियाना माना जाता है. लेकिन पश्चिम चंपारण के गोपालपुर थाना क्षेत्र के बड़का गांव से जो खबर आई, उसने न सिर्फ इंसानियत को झकझोर दिया, बल्कि ममता के वजूद पर भी एक ऐसा गहरा घाव दे दिया है जिसकी टीस सदियों तक महसूस की जाएगी. एक मां ने अपनी ही छह माह की बच्ची को अपने ही हाथों से मार डाला. क्या कोई मां वाकई इतनी निष्ठुर हो सकती है कि सिर्फ बच्ची के रोने से परेशान होकर उसका गला रेत दे? इस दिल दहला देने वाली वारदात के पीछे सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि एक ऐसा अनकहा और अनदेखा दर्द छुपा नजर आता है, जिसे अक्सर हमारा समाज पहचान नहीं पाता.
मृतक बच्ची के पिता सुनील दास चंडीगढ़ में मजदूरी करते हैं. घर की चारदीवारी में मां सीमा देवी अपनी सास और छह महीने की बेटी के साथ रहती थी. जरा सोचिए उस अकेलेपन और मानसिक दबाव के बारे में, जिससे यह महिला शायद हर रोज गुजर रही होगी. पति मीलों दूर, आर्थिक तंगी और एक छोटे बच्चे को पालने की चौबीस घंटे की जिम्मेदारी. घटना गुरुवार की रात की है. गुरुवार रात मासूम पूजा लगातार रोए जा रही थी, तो शायद सीमा के भीतर का कोई बांध टूट गया. उसने हसुआ उठाया और पूजा का गला काट दिया. लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि यह कोई सोची-समझी क्रूरता नहीं थी.जैसे ही सीमा को अपनी इस खौफनाक गलती का अहसास हुआ होगा, वह खुद को संभाल नहीं पाई. उसने तुरंत उसी हसुए से अपने गले पर भी वार कर लिया. वह खुद को खत्म कर लेना चाहती थी, क्योंकि ममता की वह हत्यारी मां शायद उस अपराधबोध को सहने के लायक नहीं बची थी.
शुरुआती जांच में पुलिस कह रही है कि महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी. चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे ‘पोस्टपार्टम साइकोसिस’ या प्रसव के बाद होने वाला गहरा अवसाद भी कहा जा सकता है. इसमें महिलाएं इस कदर मानसिक संतुलन खो बैठती हैं कि उन्हें सही और गलत का होश ही नहीं रहता.
यह भी पढ़ें: दिल्ली के नरेला में दर्दनाक हादसा: खुले नाले में गिरकर युवक की मौत, अंधेरे और लापरवाही पर उठे सवाल
सास सरस्वती देवी ने जब पोती को खून से लथपथ और बहू को तड़पते देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. आज पूजा इस दुनिया में नहीं है और सीमा अस्पताल के बिस्तर पर पुलिस हिरासत में है. यह घटना सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं है, यह हमारे समाज के लिए एक चेतावनी है. क्या हम अपने घर की बहुओं और नई मांओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं? जब वे अकेलेपन, चिड़चिड़ेपन या अवसाद से जूझ रही होती हैं, तो क्या हम उन्हें सहारा देते हैं? अगर सीमा के इस अनकहे मानसिक दर्द को वक्त रहते समझ लिया जाता, तो आज एक मासूम की जान न जाती और न ही एक मां जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में इस कलंक के साथ सांसें ले रही होती.
भारत एक्सप्रेस
इटावा में महज 500 रुपये की रंगदारी न देने पर कार सवार दबंगों ने दो…
दिवाली और छठ पूजा पर घर जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने मुंबई और…
PERM Program Suspension: अमेरिका ने PERM प्रोग्राम से इंफोसिस, TCS, विप्रो, HCL, कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट और…
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में बीजेपी और आरएसएस…
India Mobile Congress 2026: इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी…
रांची के हरमू स्थित जनरल ए.एस. वैद्य चौक का नाम बदलने को लेकर बीजेपी और…