चंडीगढ़ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन WISE 4.0 में महिला सशक्तीकरण, सामाजिक सोच और व्यावहारिक स्थिरता (Sustainability) पर बेहद बेबाक और जमीनी विचार सामने आए. इस महत्वपूर्ण आयोजन का मीडिया पार्टनर ‘भारत एक्सप्रेस’ न्यूज नेटवर्क है. कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) पूर्व प्रतिनिधि रेखा शर्मा और वरिष्ठ वक्ताओं ने समाज में महिलाओं की भागीदारी, पारिवारिक परंपराओं से जुड़ी रिसाइकिलिंग संस्कृति और महिला-से-महिला हैंडहोल्डिंग पर गहन चर्चा की.
‘क से किसान’ के सामने पुरुष नहीं, महिला की तस्वीर भी हो: सोच बदलने पर जोर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए रेखा शर्मा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की अनदेखी पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि आज भी खेतों में बुवाई से लेकर कटाई तक का अधिकांश काम महिलाएं करती हैं, लेकिन इसके बावजूद जब हम प्राथमिक कक्षाओं का कायदा पढ़ते हैं, तो ‘क से किसान’ के आगे सिर्फ पुरुष किसान की तस्वीर छपी मिलती है. वक्ताओं ने कहा कि जब तक समाज अपनी इस सोच को नहीं बदलेगा और खेती-किसानी में महिलाओं के श्रम को पहचान नहीं देगा, तब तक वास्तविक सशक्तीकरण अधूरा रहेगा.
रेखा शर्मा ने भारतीय घरों की पारंपरिक बुद्धिमत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि आज दुनिया जिस सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊ जीवनशैली) की बात करती है, वह हमारी माताओं के स्वभाव में हमेशा से रही है. पुरानी जींस से स्कूल बैग बनाना, फटे कपड़ों से दरी (कारपेट) बुनना और कोयले के चूरे से अंगीठी के लड्डू बनाना हमारी सदियों पुरानी बचत और रिसाइकिलिंग की कला है. वक्ताओं ने उदाहरण दिया कि अपनी अलमारियों में बंद अतिरिक्त साड़ियों या कपड़ों को जरूरतमंदों के साथ साझा करने की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए. आज यही सस्टेनेबिलिटी और अपसाइक्लिंग महिलाओं के लिए एक बड़ा और व्यावहारिक बिजनेस मॉडल बन सकता है.
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पूर्व में NCW और IIMs के सहयोग से 10वीं-12वीं पास युवतियों को दी गई एंटरप्रेन्योरशिप ट्रेनिंग का उदाहरण देते हुए वक्ताओं ने सफल महिलाओं से अपील की कि वे आगे बढ़ें और कम साधन वाली महिलाओं का हाथ थामें (Handholding करें). इसके साथ ही आयोजकों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि यह सम्मेलन ग्रामीण महिलाओं के लिए है, तो इसे बड़े शहरों के फाइव-स्टार होटलों में समेटने के बजाय सीधे भारत के गांवों में आयोजित किया जाना चाहिए. जब दो दिवसीय सत्र सीधे ग्रामीण अंचलों में होंगे, तभी वहां से वास्तविक प्रतिभाएं और महिला उद्यमी निखरकर सामने आ सकेंगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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