नवीनतम

‘नेहरू कैबिनेट में नहीं थी सामाजिक विविधता’; देवेगौड़ा बोले- 2,593 पार्टियों के बीच सफल हैं पीएम मोदी

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने एक विशेष लेख के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक कार्यकाल के महत्व को रेखांकित किया है, जिसमें उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सर्वाधिक समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. इस लेख में देवेगौड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जवाहरलाल नेहरू, दोनों के कार्यकालों तथा उनके समय की समकालीन परिस्थितियों की एक तुलनात्मक समीक्षा भी प्रस्तुत की है.

‘मोदी इसलिए इतने सफल हैं क्योंकि वे सोच-समझकर फैसले लेते हैं’ शीर्षक वाले लेख में एच. डी. देवेगौड़ा ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं. यह जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड से भी आगे है. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह इस तथ्य का प्रमाण है कि भारत में लोकतंत्र न केवल कायम रहा, बल्कि लगातार मजबूत भी हुआ है.

नेहरू और मोदी के दौर की राजनीतिक परिस्थितियों की तुलना

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि 1947 में कई समान रूप से प्रतिभाशाली और समर्पित लोगों में से नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री चुना गया था और यह सब असाधारण परिस्थितियों में हुआ था. असल में जनता पर महात्मा गांधी के नैतिक प्रभाव ने ही इस नियुक्ति को सुनिश्चित किया था. इसके बाद नेहरू 1952 के पहले आम चुनाव में महात्मा गांधी का आशीर्वाद और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रतिष्ठा, दोनों को साथ लेकर उतरे थे. उस समय, कांग्रेस पार्टी का एकाधिकार था और उसे किसी राजनीतिक मुकाबले का सामना नहीं करना पड़ा. हालांकि आम चुनाव में 53 राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सा लिया, लेकिन उनकी मौजूदगी और असर बहुत कम था. उस समय से लेकर 2014 में नरेंद्र मोदी के पहली बार और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक, भारत एक बहुत अलग देश बन गया. आकार, विविधता और अर्थव्यवस्था के मामले में तो यह लगभग पहचान में न आने लायक हो गया.

देवेगौड़ा ने लिखा कि यह कहना आकर्षक तो लगता है, लेकिन पूरी तरह उचित नहीं कि 2014 या 2024 की तुलना में 1952 में प्रधानमंत्री चुना जाना आसान था. उन्होंने कहा कि जब वह 1996 में प्रधानमंत्री बने थे, तब तक राजनीतिक परिस्थितियां, चुनावी पैमाना और प्रतिस्पर्धा पूरी तरह बदल चुके थे. देश अधिक जागरूक, अधिक जुड़ा हुआ और अधिक परिपक्व हो चुका था. उन्होंने कहा, “नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के प्रधानमंत्रियों के लिए कोई विशेष चमक-दमक या रुतबा नहीं था. दूसरों के पास आगे बढ़ने के लिए कोई विशेषाधिकार, खानदानी रसूख या संरक्षण उपलब्ध नहीं था. नरेंद्र मोदी और मेरे मामले में हमारे पास वह सामाजिक और सांस्कृतिक पूंजी भी नहीं थी, जिसका कई अन्य प्रधानमंत्रियों ने लाभ उठाया था.”

पीएम मोदी का स्टैमिना अद्भुत

पूर्व प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “मेरा कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चला. मैं केवल 11 महीने तक प्रधानमंत्री रहा. मैं सोचता हूँ कि पीएम मोदी किस आशीर्वाद से बिना किसी थकान के शीर्ष पर बने हुए हैं. न तो उनमें कोई थकान दिखाई देती है और न ही उन्हें चुनने वाले लोगों में. पद पर रहते हुए उनका स्टैमिना और सहनशक्ति वास्तव में विशेष है.”

ये भी पढ़ें: ‘रमजान में बम गिराना दोगलापन’, UNSC में अफगानिस्तान का मसीहा बना भारत, जानें पाकिस्तान को कैसे धोया?

एच. डी. देवेगौड़ा ने आगे लिखा, “यदि केवल राजनीतिक मुकाबले की बात करें तो 1952 के चुनावों में 53 पार्टियां मैदान में थीं, जबकि 2024 में मोदी का मुकाबला 2,593 पार्टियों से था. नेहरू के समय मतदाताओं की संख्या 17 करोड़ थी, जो 2014 तक बढ़कर 83 करोड़ हो गई. भारत की आबादी, जो 1952 में 34 करोड़ थी, आज 146 करोड़ से अधिक है.”

कैबिनेट की सामाजिक विविधता

उन्होंने आगे कहा कि एक और बात जिसने मेरा ध्यान खींचा, वह यह है कि नेहरू की कैबिनेट में भारत की सामुदायिक, सांस्कृतिक और जातीय विविधता की झलक नहीं मिलती थी. यहां तक कि जब नेहरू प्रधानमंत्री के तौर पर अपने तीसरे और आखिरी कार्यकाल में थे, तब भी उनकी कैबिनेट में ज्यादातर ऊंची जाति के पुरुष ही थे. नेहरू ने काका केलकर कमीशन की रिपोर्ट को ठुकरा दिया था, जिसमें दबे-कुचले और पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने की कोशिश की गई थी.

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि मोदी की मौजूदा कैबिनेट अधिक विविधतापूर्ण है. इसमें 27 ओबीसी (OBC), 10 एससी (SC) और 5 एसटी (ST) सदस्य हैं. महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है. उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी ने अप्रैल 2026 में संसद की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव गंभीरता से रखा है, ताकि महिलाओं को ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व मिल सके और देश अधिक मजबूत संघ के रूप में आगे बढ़ सके. उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही पारित कराया जा चुका है.

चौबीसों घंटे होने वाली तीखी आलोचना

देवेगौड़ा ने कहा कि आज का भारत नेहरू के समय की तुलना में कहीं अधिक मुखर और सक्रिय लोकतंत्र है. जाति, संवैधानिक अधिकारों, नागरिक अधिकारों, लैंगिक समानता और पर्यावरण जैसे मुद्दों को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है. उन्होंने कहा कि नेहरू के समय देश की बड़ी आबादी अशिक्षित थी और लोकतांत्रिक सरकार से अपेक्षाओं को लेकर भी स्पष्ट समझ नहीं थी. आज के नागरिक, हमारे देश और लोकतंत्र की भलाई के लिए ज्यादा पढ़े-लिखे और जागरूक हैं तथा उनकी नजर से कुछ भी नहीं बचता.

उन्होंने कहा, “जवाहरलाल नेहरू को अधिक से अधिक आधा दर्जन अखबारों से ही जूझना पड़ता था, जबकि पीएम मोदी को हर समय लाखों लोगों की नजरों का सामना करना पड़ता है. क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आलोचना बिना पुष्टि वाली, अनुचित और बहुत कठोर व व्यक्तिगत भी हो सकती है. साथ ही, उन्हें मुख्यधारा की प्रेस की चौबीसों घंटे होने वाली आलोचना और कभी-कभी दुश्मनी का भी सामना करना पड़ता है. नेहरू के समय में टेलीविजन न्यूज नहीं थी.”

समर्पण ही मोदी की सफलता का राज

देवेगौड़ा ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी को इस बात के लिए बधाई देता हूँ कि उनकी देखरेख में भारत एक मजबूत लोकतंत्र बना हुआ है. भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाए रखने की उनकी कोशिशें, उनकी कल्याणकारी नीतियां और सैन्य टकराव के समय निर्णय लेने की क्षमता विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं. देशहित के मामलों में उन्होंने कभी समझौता नहीं किया.”

उन्होंने अंत में कहा, “पीएम मोदी केवल देश के कार्यकारी प्रमुख ही नहीं रहे हैं, बल्कि देश के प्रमुख मार्गदर्शक भी रहे हैं. उन्होंने लगातार संवेदनशीलता के साथ समाज के हर वर्ग से संवाद किया है. मैं उनका ‘मन की बात’ कार्यक्रम कभी नहीं छोड़ता. मैं उन पुरस्कारों की सूची भी देखता हूँ, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वालों को सम्मानित किया जाता है. यहां भी उन्होंने देश के हर हिस्से तक पहुंचने का प्रयास किया है. किसी अन्य प्रधानमंत्री ने उनकी तरह तकनीक का उपयोग नहीं किया. यह सब निस्वार्थ समर्पण के बिना संभव नहीं था. अंततः मोदी इसलिए सफल हैं क्योंकि वे लगातार आत्ममंथन करते रहे हैं और स्वयं को निरंतर जांच-परख के लिए खुला रखते हैं.”

नोट- यह खबर एजेंसी (IANS) फीड से सीधे पब्लिश की गई है. इसमें किसी भी जानकारी को नहीं बदला गया है. खबर को पढ़ने लायाक बनाने के लिए लिए केवल हेडलाइन बदली गई है. वहीं पैराग्राफ से पहले सबहेड जोड़े गए हैं. इस स्टोरी को लेकर भारत एक्सप्रेस की किसी भी तरह की नैतिक जिम्मेदारी नहीं होगी.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

Recent Posts

छत से कूदने से पहले कमरे में क्या हुआ था? प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत बनी मिस्ट्री

मथुरा-वृंदावन के गुरु कृपा कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण…

31 seconds ago

गृह मंत्री अमित शाह का नमन: तीसरे पातशाह श्री गुरु अमरदास के जोती जोत दिवस पर अर्पित की श्रद्धांजली

Amit Shah Tribute: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिख धर्म के तीसरे गुरु, श्री…

19 minutes ago

बिजली मिस्त्री से साधु तक: कैसे रसिक दुलारी शरण बना जबलपुर का दीपक? जानें प्रेमानंद के शिष्य की कहानी

Premanand Disciple Rasik Dulari Sharan Biography: संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की…

20 minutes ago

West Bengal Crime: मेदिनीपुर में BJP कार्यकर्ता की पीटकर हत्या का आरोप, गुटबाजी के विवाद से जुड़ा मामला

Medinipur BJP Worker Death: पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर ग्रामीण इलाके में 32 वर्षीय बीजेपी कार्यकर्ता…

30 minutes ago

बंगाल जयंती पर अमित शाह का नमन: ‘वर्ण परिचय’ से ‘विधवा विवाह’ तक… ईश्वरचंद्र विद्यासागर के योगदान को किया याद

Vidyasagar Jayanti Tribute: बंगाल पुनर्जागरण के महान स्तंभ ईश्वरचंद्र विद्यासागर जी की जयंती पर उन्हें…

36 minutes ago

CBSE 2026: नाम, DOB या माता-पिता के नाम में गलती पर बोर्ड का सख्त रुख, स्कूलों को दिए निर्देश

CBSE Rules 2026: CBSE ने 23 सितंबर 2026 के सर्कुलर में स्कूलों को छात्रों की…

56 minutes ago