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वैश्विक व्यापार पर टैरिफ का साया: एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की रिपोर्ट- भारत की विकास दर मजबूत बनी रहेगी

एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की रिपोर्ट ‘टैरिफ्स आर मेड इन द यूएसए, बट रेजिलिएंस इज मेड इन इंडिया’ के अनुसार, अमेरिका के आक्रामक टैरिफ शासन के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. 2025-26 के पहले तिमाही में भारत का जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो घरेलू खपत, सरकारी पूंजीगत व्यय और राजस्व व्यय में सुधार से समर्थित है. रिपोर्ट में कहा गया है कि उच्च-आवृत्ति वाले संकेतक मिश्रित रुझान दिखा रहे हैं और व्यापार टैरिफ की अनिश्चितता परिदृश्य को धुंधला कर रही है, लेकिन जीएसटी संरचना को सरल बनाने का सरकारी फैसला अर्थव्यवस्था में लगभग 50,000 करोड़ रुपये छोड़ देगा, जो घरेलू खपत को बढ़ावा देगा. यह निर्यात संभावनाओं के कमजोर होने और बाहरी प्रतिकूलताओं के खिलाफ अर्थव्यवस्था को कुशन प्रदान करेगा.

अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव

अमेरिका ने अगस्त के अंत में पारस्परिक टैरिफ लागू किए, जो भारतीय निर्यात पर गहरा असर डाल रहे हैं. इनमें 50% तक की दरें लगाई गई हैं, जिसमें रूस से कच्चे तेल के आयात से जुड़ी 25% शुल्क भी शामिल है. इससे ऑटोमोबाइल, कृषि, वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ‘जब तक स्पष्टता नहीं आती, व्यापार-नीति की अस्थिरता ऊंची बनी रहेगी, जिसमें ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और वस्त्र मुख्य दबाव बिंदु हैं.’ निर्यातकों को उच्च लागत का सामना करना पड़ रहा है और आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं. इन टैरिफ की कानूनी वैधता पर सवाल उठे हैं, अमेरिकी अपील कोर्ट ने इन्हें असंवैधानिक घोषित किया है और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.

कच्चे तेल का आयात

कच्चे तेल के आयात पर विशेष जोर देते हुए रिपोर्ट बताती है कि रूस से आयात से जुड़े टैरिफ दबाव बढ़ा रहे हैं. भारतीय इक्विटी उभरते बाजारों के साथियों से कमजोर प्रदर्शन कर रही हैं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के बहिर्वाह और टैरिफ प्रतिकूलताओं के कारण. भारतीय रुपया रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुंच गया, जो सालाना 5% गिरा है, जबकि आरबीआई ने विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए हस्तक्षेप सीमित रखा है. वैश्विक स्तर पर शंघाई सहयोग संगठन जैसे वैकल्पिक गठबंधन व्यापार प्रवाह को नया आकार दे रहे हैं, जबकि चीन के एंटी-इनवोल्यूशन उपाय वस्तु बाजारों को समर्थन दे रहे हैं. अमेरिका और ब्रिटेन में राजकोषीय तनाव तथा नरम अमेरिकी रोजगार डेटा से सितंबर में ब्याज दर कटौती की उम्मीदें बढ़ी हैं, जो भारत की ऊंची यील्ड कर्व के विपरीत है, जो राज्य उधारी से प्रभावित है.

घरेलू लचीलापन और पूर्वानुमान

रिपोर्ट का अनुमान है कि ये उपाय निर्यात संभावनाओं के कमजोर होने और बाहरी प्रतिकूलताओं के खिलाफ अर्थव्यवस्था को संरक्षित करेंगे. भारत की घरेलू मजबूती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच चमक रही है, जो निर्यात पर निर्भरता कम करके आंतरिक खपत पर जोर दे रही है.

Bharat Express Desk

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