दिल्ली में आयोजित एसेट रिकवरी इंटरएजेंसी नेटवर्क-एशिया पैसिफिक (ARIN-AP) की 11वीं वार्षिक आम बैठक खत्म हो गई है. इसकी मेजवानी भारत ने की. आयोजित तीन दिवसीय बैठक का समापन 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुआ. इसकी मेजबानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने की. बैठक में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान, जब्ती और वापसी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.
नेटवर्क से जुड़े 32 सदस्य देशों और 10 पर्यवेक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा अभियोजक, जांच अधिकारी, वित्तीय खुफिया अधिकारी, एसेट मैनेजर और नीति विशेषज्ञ भी बैठक में शामिल हुए.
बैठक की थीम “Closing the Loop: From Tracing to Return” रखी गई थी. इसका मकसद अपराध से जुड़ी संपत्ति की पहली पहचान से लेकर उसकी जब्ती और आखिर में पीड़ितों या सरकार को वापसी तक की पूरी प्रक्रिया को एक साथ देखने पर रहा. बैठक में वर्चुअल एसेट और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मामलों की जांच पर भी चर्चा हुई.
अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल संपत्तियों के तेजी से ट्रांसफर को देखते हुए सर्विस प्रोवाइडर्स और ब्लॉकचेन एनालिटिक्स के जरिए तेजी से कार्रवाई जरूरी है.
सीमा पार संपत्तियों की पहचान और जांच में विदेशी एजेंसियों के बीच सहयोग तथा इंटेटपोल के सिल्वर नोटिस के शुरुआती अनुभवों पर भी चर्चा हुई. बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि अनौपचारिक स्तर पर होने वाला सहयोग तभी ज्यादा प्रभावी होता है, जब उसके बाद जरूरी औपचारिक अनुरोध की प्रक्रिया भी समय पर पूरी की जाए. बैठक में गैर-दोषसिद्धि आधारित संपत्ति जब्ती के कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा हुई. इसमें सबूतों के मानक, रिवर्स ऑनस और कार्रवाई की आनुपातिकता जैसे मुद्दों पर अदालतों के स्तर पर आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया गया.
अधिकारियों ने यह भी कहा कि संपत्ति को जब्त करने के बाद उसकी सही तरीके से देखरेख जरूरी है. अगर जब्ती और अंतिम कुर्की के बीच संपत्ति की कीमत कम हो जाती है, तो इससे पूरी रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. बैठक में अपराध से जब्त संपत्तियों को पीड़ितों को लौटाने, सरकारी खजाने में जमा करने और जब्त संपत्तियों के सामाजिक उपयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई.
भारत ने PMLA, 2002 के तहत बड़े स्तर पर पीड़ितों को संपत्ति वापस किए जाने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए. बैठक में ब्रिटेन की Financial Conduct Authority और HM Revenue and Customs, अमेरिका की IRS Criminal Investigation, इटली की Guardia di Finanza, यूक्रेन की ARMA और Asset Reality के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा किए. अब अगली बैठक 2027 में होगा, जिसकी अध्यक्षता सिंगापुर करेगा. सिंगापुर की ओर से Attorney-General’s Chambers के Chief Prosecutor for International Engagement डेविड च्यू ने अध्यक्षता ग्रहण की.
डेविड च्यू ने कहा कि नेटवर्क की सफलता के लिए सदस्य देशों के बीच विश्वास बेहद महत्वपूर्ण है और सिंगापुर अपनी अध्यक्षता के दौरान इस सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा. भारत ने सिंगापुर को 2027 की अध्यक्षता के लिए शुभकामनाएं दीं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में उसे पूर्ण समर्थन देने का भरोसा जताया.
बैठक में यह संदेश भी सामने आया कि संपत्ति की रिकवरी तभी प्रभावी हो सकती है, जब वित्तीय खुफिया एजेंसियां, जांच एजेंसियां, अभियोजन, अदालतें और एसेट मैनेजमेंट से जुड़ी संस्थाएं एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल में काम करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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