आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के हो रहे दुरुपयोग ने सरकार न्यायपालिका की चिंता को बढ़ा दिया है. एआई का दुरुपयोग निजता और सामाजिक गरिमा पर गहरा प्रहार है. इससे न केवल व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुच रही है, बल्कि कई बार लोगों की जान तक खतरे में पड़ रही है. इसका इस्तेमाल कर लड़कियों का अश्लील तस्वीर बनाकर ब्लैक मेल किया जा रहा है. इस तरह की घटनाएं आए दिन.देखने को मिलती है.
हालही में नवा रायपुर स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के एक छात्र सैय्यद रहीम ने एआई से 36 छात्राओं की 1000 अश्लील फोटो बना दिया, जो उसके लैपटॉप और मोबाइल से बरामद किया गया. पुलिस ने इसको बिलासपुर से गिरफ्तार कर लिया है. उसने अपने साथ पढ़ने वाली छात्राओं और अन्य छात्रों की इंस्टाग्राम, फेसबुक और लिंक्डइन जिसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म से प्रोफाइल पिक्चर्स डाउनलोड की थी, इससे दिल्ली सहित कई राज्यों में इस तरह के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
ऐसा नहीं है कि इससे सिर्फ महिलाएं या छात्राएं ही परेशान है. फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ सहित कई दिग्गज हस्तियां अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी है. चैटजीपीटी के माध्यम से फर्जी वोटर कार्ड आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज बनाए जा रहे है. जिसका इस्तेमाल खासकर घुसपैठिए कर रहे है.
इतना ही नहीं इसका इस्तेमाल साइबर ठग भी कर रहे है. साइबर ठग सोशल मीडिया से आपका वीडियों चोरी करते हैं फिर आपकी आवाज कॉपी कर उसे एआई की मदद से अपने अनुसार सेंटेंस तैयार करते हैं. इसके बाद सोशल मीडिया से चुराई आपके वीडियो की एडिटिंग कर आपकी ही आवाज में तैयार ऑडियो की मिक्सिंग कर देते हैं. यह सब इतनी बारीकी से किया जाता है कि जिसे आसानी से समझना मुश्किल ही जाता है. ऐसे वीडियो के माध्यम से ठग आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देकर लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं.
हालांकि विशेषज्ञ मानते है कि कुछ सुरक्षा उपायों को अपनाकर इस दुरुपयोग को कम किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए जल्द ही ठोस नीतियां और कड़े कानून बनने चाहिए. साथ ही, ऐसे तकनीकी फीचर्स भी विकसित किए जाने चाहिए, जिनके किसी की फोटो, विडियो या दस्तावेज का दुरुपयोग न हो सके. हालांकि यह कठिन कार्य है, लेकिन निजता की सुरक्षा और समाज की शांति बनाए रखने के लिए अनिवार्य है.
सुप्रीम कोर्ट ने वकील और साइबर कानून के जानकार विराग गुप्ता बताते है कि एआई से जुड़े अपराधों के कई हिस्से हैं और उन हिस्सों को रेगुलेट करने के लिए और कानून के दायरे में लाने के लिए भारत में कानूनी व्यवस्था तो है ही नहीं, उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल पर भी इसको लेकर सीमित कानून है. उन्होंने कहा कि हमारे यहां फेक न्यूज से निपटने तक के लिए कानून नही है. इसको लेकर जब तक कानून नही बनेगा तब तक एआई के जरिए फर्जीवाड़ा होता रहेगा.
सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी दुबे ने कहा किएआई के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कानून है लेकिन उतना कारगर नही है. क्योंकि सवाल उठता है कि अपराध किस नेचर का है. इनका कहना है कि एजेंसी या पुलिस को तकनीकी हिसाब से अपने आप को विकसित करना बहुत जरूरी है. दिल्ली हाई कोर्ट के वकील आशीष चौबे की माने तो एआई के दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ बीएसएस के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
उन्होंने कहा कि अगर कोई एआई या चैटजीपीटी के माध्यम से अश्लील फोटो बनाता है और उगाही करता है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(1) के तहत मुकदमा दर्ज करा सकता है. इसमें सात साल की सजा और जुर्माना का प्रावधान है. अगर कोई अश्लील फोटो बनाकर वायरल करता है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 294 के तहत शिकायत दर्ज करा सकते है.
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-भारत एक्सप्रेस
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