लीगल

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को कोलकत्ता हाई कोर्ट से झटका, वॉइस सैंपल मामले में अंतरिम राहत देने से किया इनकार

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को कोलकत्ता हाई कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से कोलकत्ता हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है. कोर्ट ने सीआईडी के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार किया है, जिसमें उन्हें वॉइस सैंपल देने को कहा गया था. अभिषेक बनर्जी ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट का रुख किया था.

भड़काऊ भाषण से जुड़ा मामला

डीजे टिप्पणी मामले में सीआईडी द्वारा आवाज का नमूना लेने की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कोलकाता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. यह मामला पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ भाषण से जुड़ा है.

मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट का आदेश कानून के अनुरूप नहीं है. उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 349 के तहत वॉइस सैंपल लेने का आदेश देने से पहले मजिस्ट्रेट को कारण बताने होते है, लेकिन इस मामले में ऐसा नही किया गया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुनवाई से पहले उनको उनका पक्ष रखने का मौका नही दिया गया.

मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक

अभिषेक बनर्जी के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि यह पहले से ही जांच में सहयोग कर रहे हैं और अपनी आवाज या बयान से इनकार नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कोर्ट से कहा कि वॉइस सैंपल लेने की आवश्यकता क्या है, उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि जब तक इस मुद्दे पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक उन्हें मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगाई जाए.

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि एफआईआर से जुड़ा मामला पहले से हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ के पास लंबित है. जिसके द्वारा कार्रवाई से बचने की कोशिश की गई है.

ठोस कार्रवाई करने पर लगाया रोक

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि इसी मामले में एक अन्य पीठ पहले ही 31 जुलाई तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने पर रोक लगा रखा है.

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी कानून के तहत वॉइस सैंपल लेना चाहती है तो उसकी आवश्यकता का आकलन करना अदालत का काम नहीं है.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही एफआईआर से जुड़े मामले में अलग-अलग पीठों द्वारा सुनवाई होने से परस्पर विरोधी आदेश आने की आशंका है. इसलिए उचित होगा कि याचिकाकर्ता अपनी आपत्तियां उसी पीठ के समक्ष रखें, जहां मूल रिट याचिका पहले से लंबित है.

ये भी पढ़ें: ‘सिर्फ एजेंसियां नहीं, जनता को भी समझनी होगी जिम्मेदारी’, दिल्ली के नालों की सफाई पर हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

QS एशिया रैंकिंग में CCSU की बड़ी छलांग, 694वें स्थान पर पहुंचा विश्वविद्यालय

QS एशिया रैंकिंग में CCSU ने बड़ी छलांग लगाई है.पिछले साल सीसीएसयू 801–850 के रैंक…

3 hours ago

योगी की छाया में अपना वजूद तलाशते नितिन नवीन

गोरखपुर में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और CM योगी की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा निकली. सपा…

3 hours ago

अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों का दम, जानें कौन जीता और कौन हारा?

US Midterm Elections 2026: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के 57 उम्मीदवारों ने…

5 hours ago

दिल्ली SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट इस तारीख को करेगा सुनवाई, 33 लाख नोटिस और 47 लाख नाम काटने के आरोपों पर EC से तीखे सवाल

दिल्ली में वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को सुनवाई करेगा. 33…

5 hours ago

‘देश को पीएम मोदी पर भरोसा, राहुल को नकारा’, गोरखपुर में बीजेपी अध्यक्ष का कांग्रेस पर बड़ा हमला

गोरखपुर में बीजेपी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा’ के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन…

5 hours ago