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‘सिर्फ एजेंसियां नहीं, जनता को भी समझनी होगी जिम्मेदारी’, दिल्ली के नालों की सफाई पर हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली में जलभराव और नालों की सफाई के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकारी महकमों के साथ-साथ जनता को भी जिम्मेदार बनना होगा. कोर्ट ने गंदगी फैलाने पर लगने वाले ₹500 के जुर्माने को नाकाफी बताते हुए एमसीडी से इसे बढ़ाने का प्रस्ताव मांगा है.

Delhi High Court

Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली में जलभराव और नालों की सफाई से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सिर्फ सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी तय होने से समस्या से निजात नहीं मिल सकता. इसके लिए जरूरी है कि आम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की है.

लोगों को भी बनना होगा जिम्मेदार

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि छोटे-छोटे देश भी अपने शहरों में स्वच्छ और व्यवस्थित रखने में सफल हैं, फिर दिल्ली में ऐसी स्थिति क्यों बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि इस समस्या की समाधान के लिए सरकारी विभागों के साथ-साथ लोगों को भी जिम्मेदार बनना होगा.

कोर्ट ने वियतनाम का जिक्र करते हुए कहा कि छोटा देश ऐसा कैसे करते है. कोर्ट ने कहा कि इसे नागरिकों की नागरिक बोध के साथ जोड़कर देखना होगा. कोर्ट ने सवाल उठाते हुए पूछा कि सड़क पर कचरा फेंकने वाले लोगों के खिलाफ सजा या कार्रवाई की जाती है? इसपर वकील ने कहा कि लोगों को कचरा न फेंकने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए.

नाले में कूड़ा फेंका तो होगी सख्त कार्रवाई

जस्टिस प्रतिभा सिंह ने पूछा कि यह पूरे देश मे होना चाहिए? यह इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है. मामले में तैमूर नगर नाले की तस्वीरें अदालत के सामने रखी गई, जिनसे पता चला कि वहां अब भी नियमित सफाई नहीं हो रही है और लोग लगातार नाले में कूड़ा फेंक रहे हैं. इस पर अदालत ने संबंधित क्षेत्र के बीट कांस्टेबलों को भी आदेश से अवगत कराने को कहा, ताकि सफाई व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भी भूमिका सुनिश्चित हो सकें.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नाले में कूड़ा फेंकने की प्रवृत्ति जारी रही तो वह सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. मामले की सुनवाई के दौरान एमसीडी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को सड़क पर गंदगी फैलाने पर लगाए जाने वाले चालानों के बारे में अदालत को अवगत कराया. इसपर अदालत ने कहा कि वर्तमान में 500 रुपए का जुर्माना पर्याय नहीं है.क्योंकि नालों में कूड़ा फेंकने से जलभराव जैसी गंभीर समस्या पैदा होती है.

MCD और दिल्ली जल बोर्ड मिलकर करें काम

अदालत ने एमसीडी से जुर्माने की राशि बढ़ाने पर विचार कर प्रस्ताव पेश करने को कहा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि एमसीडी और दिल्ली जल बोर्ड मिलकर ऐसे स्थानों की पहचान करें जहां सीवर का पानी वर्षा जल निकासी वाले नालों में जा रहा है और उसे रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई करने को कहा है.

वहीं, अदालत को बताया गया है संबंधित क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू हो चुका है और उसकी स्थिति रिपोर्ट पेश किया गया. कोर्ट को बताया गया है जहां नाले खुले है वहां नालों पर पत्थर का स्लैब लगाया जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि एक बार स्लैब लग जाए तो इसकी देखरेख की जिम्मेदारी स्थानीय कल्याण संघ की होगी.

कोर्ट ने रोहतक रोड़ पर नाले के काम को दो सप्ताह में पूरा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ब24 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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