दिल्ली में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में दुनिया के 70 से अधिक देशों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अलग-अलग देशों में कानून व्यवस्था, इंजीनियरिंग की परंपराएं और विकास की जरूरतें भले ही अलग हों, लेकिन सभी का लक्ष्य एक ही है.
आम आदमी की जरूरतों और आकांक्षाओं को ऐसे बुनियादी ढांचे में बदलना, जिससे उसकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो सके. कहा गया है कि किसी पुल को इंजीनियर डिजाइन, निर्माण सामग्री और उसकी मजबूती के नजरिए से देखता है, जबकि ठेकेदार के लिए वह एक परियोजना होती है.
वहीं वकील उसे अधिकार, जिम्मेदारियों और संभावित विवादों के रूप में देखता है. लेकिन आम आदमी के लिए सवाल सीधा है कि क्या पुल उसके काम पर जाने का समय कम करेगा, क्या सड़क उसके बच्चे के स्कूल के गांव के करीब लाएगी और क्या पानी की व्यवस्था उसके घर तक पहुचेगी. यही वजह है कि इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम का सीधा असर करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है.
एफआईडीआइसी ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कानून का शासन सिर्फ गलतियों को सुधारने के बारे में नही, बल्कि यह ऐसी स्थितियां बनाने के बारे में भी है जिनसे सब कुछ सही ढंग से हो. इसलिए सफलता का असली पैमाना यह नहीं है कि हम कितनी जल्दी विवादों को सुलझाते है, बल्कि यह है कि हम प्रोजेक्ट्स को कितनी अच्छी तरह से तैयार करते हैं ताकि विवाद कम से कम हों.
सीजेआई ने कहा कि कानून का शासन असल मे इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के पूरे सिस्टम का ही एक हिस्सा है. सीजेआई ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को मिलने वाली सबसे बड़ी तारीफ अक्सर खामोशी होती है. जो पुल या सड़क बिना किसी परेशानी के अपना काम कर रहे होते हैं, उनके बारे में आमतौर पर कोई चर्चा नहीं होती. लेकिन जब कोई ढांचा विफल होता है, परियोजना में देरी होती है या किसी विवाद के कारण ठेकेदार और सरकार वर्षो तक मुकदमेबाजी में फंस जाते हैं, तब इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या सामने आती है.
परियोजना की सफलता के पीछे छिपी होती है. किसी परियोजना की सफलता सिर्फ उसकी इमारत मशीनरी या इंजियनिरिंग पर निर्भर नहीं करती. उसके पीछे एक पूरी व्यवस्था काम करती है. इसमें अनुबंध के जरिये जिम्मेदारियों का निर्धारण, सही पक्ष के चयन के लिए पारदर्शी खरीद प्रक्रिया, नियामकीय व्यवस्था, वित्तीय प्रबंध और विवाद की स्थिति में फैसला करने वाली संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की बुनियादी संरचना का हिस्सा है.
इसका मतलब सिर्फ यह नहीं है कि विवाद होने के बाद अदालत गलती को सुधार दे. जरूरी यह भी है कि शुरुआत से ही प्रक्रिया इस तरह तैयार की जाए कि सभी पक्षों की अपेक्षाएं स्पष्ट हों. अधिकारियों और शक्तियों की सीमाएं तय हों, जोखिम का उचित बंटवारा हो और विवाद होने पर उसका समयबद्ध एवं भरोसेमंद समाधान मिल सके.
सीजेआई सूर्यकांत ने अंत मे कहा कि मैं एफआईडीआइसी ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्फ्रेंस 2026 की सफलता की कामना करता हूं और आप सभी के साथ अपने विचार साझा करने के लिए मुझे आमंत्रित करने के लिए एक बार फिर आपका धन्यवाद करता हूं.
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-भारत एक्सप्रेस
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