राऊज एवेन्यु कोर्ट से आम आदमी पार्टी के विधायक अनिल झा सहित अन्य को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने सभी को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के तहत दर्ज आरोपों से बरी कर दिया है. राऊज एवेन्यु कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने जांच अधिकारियों को सलाह दी कि वे यह ध्यान रखे कि झूठे आरोपों के परिणामस्वरूप निर्दोष व्यक्तियों पर मुकदमा चलाकर उन्हें दोषी करार दिया जा सकता है और झूठे आरोप लगाए जाने के व्यक्ति को सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ सकता है.
इसके अलावे उस व्यक्ति के प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाया जा सकता है. कोर्ट ने संजय नाम एक व्यक्ति की शिकायत पर आम आदमी पार्टी के विधायक अनिल झा और चार अन्य लोगों के खिलाफ धारा 323 (स्वेच्छासे चोट पहुचाना) और धारा 34 (साझा इरादा) के तहत दर्ज मामले में यह आदेश दिया है.
अन्य आरोपों में भी बरी
अनिल झा सहित अन्य पर एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3 (1)(आर) और (एस) के तहत भी मामला दर्ज किया गया था जिसे कोर्ट ने बरी कर दिया है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2 फरवरी 2016 में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उनके साथ मारपीट किया गया और जाति सूचक शब्द का इस्तेमाल किया गया.
बता दें कि एससी/एसटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अभद्र या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना अपने आप अपने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि यह जरूरी है कि एससी और एसटी (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम 1989 के एक प्रावधान के तहत आरोपी पर मुकदमा चलाने से पहले उसके द्वारा सार्वजनिक रूप से ही कि गई टिप्पणी को आरोप पत्र में रेखांकित किया गया है.